एक्सक्लुसिव न्यूज़

⭕️Exclusive “समरथ को नहीं दोष गोसाई” N R इस्पात को संरक्षित वन में अवैध निर्माण पर हुआ मामूली जुर्माना, प्रकरण किया नस्तीबद्ध ,लेकिन कलम बचा गए अफसर..!खुलेगा प्रकरण तो मुश्किल में पड़ सकता है NR इस्पात का प्रबंधन!

⭕️ वन अधिनियम की जिन धाराओं पी ओ आर दर्ज किया गया उसके अलावा लगनी थीं अन्य गंभीर धाराएं…

⭕️ रायपुर से आए राज्य उड़नदस्ता के अधिकारियों के द्वारा की गई कार्रवाई को छुपाना वन मंडल रायगढ़ के अधिकारियों को पड़ सकता है भारी..

⭕️ क्षति का समुचित आकलन नहीं किया जाकर अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप विभाग के अधिकारियों पर…

⭕️ लंबे-चौड़े लेन देन के बाद भी चूक कर गये अफसर :-सूत्र

⭕️ उच्चस्तरीय शिकायत की तैयारी,पड़ेगी NR इस्पात प्रबंधन पर भारी..!

तमनार/रायगढ़। तमनार वन परिक्षेत्र के संरक्षित वन खण्ड क्रमांक 817 पी.एफ. में कथित रूप से बिना वैधानिक स्वीकृति के किए गए इंटकवेल निर्माण  कार्य, पाइपलाइन बिछाने, विद्युत केबल डालने तथा वृक्षों की क्षति के मामले में वन विभाग की कार्रवाई जोकि शुरू से ही संदेहास्पद थी अब मामले में दर्ज वन अपराध प्रकरण को मामूली जुर्माना वसूलने के बाद नस्तीबद्ध किए जाने को लेकर फिर से सन्देह के घेरे में है। सूचना के अधिकार से प्राप्त वन विभाग के  पी ओ आर अभिलेखों एवं मौका पंचनामा  एवं अन्य प्रतिवेदन के अनुसार, एन आर इस्पात कंपनी द्वारा संरक्षित वन क्षेत्र में इंटेक वेल (जल संग्रहण संरचना) का निर्माण कराया जा रहा था। निरीक्षण के दौरान लगभग 8 मीटर × 5 मीटर क्षेत्र में खुदाई तथा लगभग 60 मीटर लंबी ट्रेंच पाइपलाइन बिछाने के लिए वन भूमि खोदी गई पाई गई। इसके अतिरिक्त भूमिगत विद्युत केबल बिछाने का कार्य भी मौके पर पाया गया।
इस कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। पर्यावरण एवं वन संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि संरक्षित वन भूमि पर बिना स्वीकृति निर्माण, खुदाई और गैर-वन गतिविधियां की गई थीं, तो क्षति का समुचित आकलन किया जाना चाहिए था। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि वन अधिनियम के उल्लंघन के संबंध में क्या सक्षम अधिकारी के द्वारा संपूर्ण प्रकरण का प्रशमन किया जाकर आरोपी उद्योग प्रबंधन को अनैतिक लाभ पहुंचाया गया है।
मामले को लेकर वरिष्ठ वन अधिकारियों को शिकायत भेजे जाने की तैयारी की जा रही है। शिकायत में पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच, क्षति मूल्यांकन की पुनर्समीक्षा तथा प्रकरण को नस्तीबद्ध किए जाने की प्रक्रिया की जांच की मांग की जायेगी।

मुख्य संपादक यशवंत खेडुलकर

सह सम्पादक शैलेन्द्र चिटनवीस जशपुर जिला

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