छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के साथ अन्याय की इंतहा…!


“दो वर्षों तक लगातार दी गई श्रम सम्मान राशि दिसंबर 2025 से अचानक बंद, अब कर्मचारियों को नोटिस भेजकर दबाने का आरोप”
कर्मचारियों में भारी आक्रोश – “हम अपना अधिकार मांग रहे हैं, भीख नहीं”
पूर्व MD के आदेश को रोकने पर उठे गंभीर सवाल, कर्मचारियों ने शासन से उच्च स्तरीय जांच की मांग की
रायपुर।छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड में कार्यरत दैनिक एवं मासिक वेतनभोगी कर्मचारियों के बीच इन दिनों भारी असंतोष, नाराजगी एवं आक्रोश का माहौल बना हुआ है। कर्मचारियों ने निगम प्रबंधन एवं वर्तमान प्रबंध संचालक पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि कर्मचारियों के हित में पूर्व प्रबंध संचालक द्वारा जारी “श्रम सम्मान राशि” संबंधी आदेश को जानबूझकर दबाया जा रहा है तथा अपने वैधानिक अधिकार की मांग करने वाले कर्मचारियों को लीगल नोटिस भेजकर मानसिक रूप से प्रताड़ित एवं भयभीत करने का प्रयास किया जा रहा है।
दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने बताया कि निगम द्वारा आदेश क्रमांक 14005 दिनांक 15.03.2024 जारी कर दैनिक एवं मासिक वेतनभोगी कर्मचारियों को ₹4000 प्रतिमाह “श्रम सम्मान राशि” देने की स्वीकृति प्रदान की गई थी। आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि यह राशि 01 अगस्त 2023 से प्रभावशील होगी।
कर्मचारियों का कहना है कि यह आदेश शासन के निर्देशों के पालन में जारी किया गया था और इसके बाद कर्मचारियों को लगातार श्रम सम्मान राशि का भुगतान भी किया जाता रहा। कर्मचारियों के अनुसार लगभग दो वर्षों तक यह राशि नियमित रूप से कर्मचारियों को दी गई, जिससे कर्मचारियों को यह विश्वास हो गया था कि निगम ने वर्षों से कम वेतन में काम कर रहे कर्मचारियों की स्थिति को समझते हुए उनके हित में निर्णय लिया है।
लेकिन कर्मचारियों का आरोप है कि दिसंबर 2025 से अचानक बिना किसी कारण, बिना किसी लिखित आदेश एवं बिना किसी सूचना के श्रम सम्मान राशि बंद कर दी गई। कर्मचारियों ने कहा कि न तो कोई विभागीय आदेश जारी किया गया और न ही कर्मचारियों को यह बताया गया कि आखिर किस आधार पर भुगतान रोका गया है।
“जब दो वर्षों तक भुगतान हुआ तो अब क्यों रोका गया?”
कर्मचारियों ने सवाल उठाया है कि यदि श्रम सम्मान राशि देना गलत था तो फिर लगभग दो वर्षों तक लगातार भुगतान क्यों किया गया? कर्मचारियों का कहना है कि निगम प्रबंधन स्वयं अपने आदेशों और निर्णयों से पीछे हट रहा है।
कर्मचारियों के अनुसार यदि पूर्व प्रबंध संचालक द्वारा जारी आदेश में कोई त्रुटि थी तो उसे विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत निरस्त किया जाना चाहिए था, लेकिन आदेश निरस्त किए बिना भुगतान रोक देना प्रशासनिक मनमानी एवं कर्मचारियों के अधिकारों का खुला उल्लंघन है।
“कम वेतन में वर्षों से सेवा”
दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने कहा कि वे वर्षों से बेहद कम वेतन में निगम के लिए कार्य कर रहे हैं। कई कर्मचारी लंबे समय से बीज वितरण, गोदाम संचालन, कार्यालयीन कार्य एवं विभिन्न योजनाओं में लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि निगम उनसे नियमित कर्मचारियों की तरह कार्य तो लेता है, लेकिन सुविधाएं एवं आर्थिक लाभ देने के समय उन्हें दैनिक वेतनभोगी बताकर अलग कर दिया जाता है। कर्मचारियों ने इसे स्पष्ट आर्थिक शोषण बताया।
“महंगाई में परिवार चलाना मुश्किल”
कर्मचारियों ने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई, बच्चों की पढ़ाई, इलाज एवं घरेलू खर्चों के बीच परिवार चलाना बेहद कठिन हो गया है। ऐसे में श्रम सम्मान राशि कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत थी।
कर्मचारियों का कहना है कि जब दो वर्षों तक राशि दी गई तो कर्मचारियों ने उसी के अनुसार अपने परिवार की आर्थिक योजनाएं बनाई थीं, लेकिन अचानक राशि बंद होने से कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हुई है।
“बिना कारण राशि काटना अन्याय”
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि दिसंबर 2025 से राशि काटने के पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया। कर्मचारियों का कहना है कि बिना कारण एवं बिना लिखित आदेश के किसी कर्मचारी का आर्थिक लाभ रोकना अन्यायपूर्ण, अमानवीय एवं श्रमिक हितों के खिलाफ है।
“नोटिस भेजकर कर्मचारियों को डराया जा रहा”
कर्मचारियों ने कहा कि जब उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखी तो उन्हें लीगल नोटिस भेजे जाने लगे। कर्मचारियों का आरोप है कि यह कर्मचारियों की आवाज दबाने एवं आंदोलन को रोकने का प्रयास है।
कर्मचारियों ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है। उन्होंने केवल निगम द्वारा स्वीकृत राशि एवं अपने वैधानिक अधिकार की मांग की है।
“हम अपना अधिकार मांग रहे हैं, भीख नहीं”
दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने भावुक होकर कहा कि वे कोई अवैध मांग नहीं कर रहे, बल्कि निगम द्वारा जारी आदेश एवं वर्षों से किए जा रहे भुगतान के आधार पर अपना अधिकार मांग रहे हैं।
कर्मचारियों ने कहा कि “हमने वर्षों तक निगम के लिए ईमानदारी से काम किया है। आज जब हम अपना हक मांग रहे हैं तो हमें नोटिस भेजकर डराया जा रहा है।”
“मानसिक एवं आर्थिक उत्पीड़न”
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि भुगतान रोकने और नोटिस भेजने के कारण कर्मचारियों में भारी मानसिक तनाव है। कई कर्मचारी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
कुछ कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई परिवारों की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि बच्चों की पढ़ाई, इलाज और घर खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।
“पूर्व MD के निर्णय पर रोक क्यों?”
कर्मचारियों ने सवाल उठाया कि यदि पूर्व प्रबंध संचालक ने कर्मचारियों के हित में निर्णय लिया था तो वर्तमान प्रबंधन उसे लागू करने से क्यों बच रहा है? कर्मचारियों का कहना है कि इससे निगम प्रबंधन की कार्यप्रणाली और मंशा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
“कर्मचारियों की आवाज दबाने की कोशिश”
दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के बीच भय का माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि कोई भी कर्मचारी अपने अधिकारों की मांग न कर सके।
कर्मचारियों ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखना और वैधानिक अधिकार मांगना कोई अपराध नहीं है।
“अब कानूनी लड़ाई की तैयारी”
दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही श्रम सम्मान राशि पुनः लागू कर दिसंबर 2025 से लंबित भुगतान जारी नहीं किया गया तो वे मजबूर होकर श्रम आयुक्त, औद्योगिक न्यायालय, उच्च न्यायालय, लोकायुक्त एवं अन्य सक्षम मंचों का दरवाजा खटखटाएंगे।
कर्मचारियों ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा तथा पूरे मामले को जनप्रतिनिधियों, शासन, मीडिया एवं जनता के सामने रखा जाएगा।
शासन से उच्च स्तरीय जांच की मांग
कर्मचारियों ने राज्य शासन एवं कृषि विभाग से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। कर्मचारियों ने कहा कि यह जांच होनी चाहिए कि:
– जब लगभग दो वर्षों तक राशि दी गई तो अचानक उसे क्यों बंद किया गया?
– बिना कारण बताए भुगतान क्यों रोका गया?
– कर्मचारियों को नोटिस भेजने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
– पूर्व में जारी आदेश का पालन क्यों नहीं किया जा रहा?
– कर्मचारियों के वैधानिक अधिकारों को क्यों दबाया जा रहा है?
“संघर्ष जारी रहेगा”
दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने स्पष्ट कहा कि वे शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखेंगे। कर्मचारियों ने कहा कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा तब तक उनका संघर्ष समाप्त नहीं होगा।
कर्मचारियों ने शासन से अपील की है कि वर्षों से कम वेतन में कार्य कर रहे कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति, श्रम एवं समर्पण को देखते हुए तत्काल न्याय प्रदान किया जाए तथा श्रम सम्मान राशि एवं लंबित भुगतान शीघ्र जारी कराया जाए।




