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निस्वार्थ सेवा की मिसाल: विजय मौर्य

आज के दौर में जहाँ अधिकांश लोग समाज सेवा को पहचान, प्रतिष्ठा और प्रचार से जोड़कर देखते हैं, वहीं कुछ व्यक्तित्व ऐसे भी होते हैं जो चुपचाप, बिना किसी अपेक्षा के, मानवता की सेवा में समर्पित रहते हैं । विजय मौर्य उन्हीं प्रेरणादायक व्यक्तियों में से एक हैं ।

पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए भी विजय मौर्य ने पूर्वांचल भोजपुरी समाज से जुड़कर समाज सेवा को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बना लिया है । उनका कार्य केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि वे धरातल पर उतरकर जरूरतमंदों की सहायता करते हैं । विशेष रूप से मातृ एवं शिशु अस्पताल में उनका नियमित रूप से सेवा देना, उनकी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का परिचायक है ।

विजय मौर्य की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे बिना किसी पद, प्रतिष्ठा या सम्मान की अपेक्षा के अपने कार्य को निरंतर करते रहते हैं । न तो उन्हें इस बात की चिंता होती है कि कौन उनके साथ है और कौन नहीं, और न ही वे अपने कार्य का प्रदर्शन करते हैं । उनका मानना है कि सच्ची सेवा वही है, जो बिना किसी स्वार्थ और दिखावे के की जाए ।

समाज में ऐसे व्यक्तित्व विरले ही देखने को मिलते हैं, जो अपने कर्म को ही अपना परिचय मानते हैं। विजय मौर्य का यह समर्पण और निस्वार्थ भाव न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह हम सभी को यह संदेश भी देता है कि यदि मन में सेवा का भाव हो, तो बिना किसी संसाधन या समर्थन के भी बहुत कुछ किया जा सकता है ।

वास्तव में, विजय मौर्य का जीवन और कार्य हम सभी के लिए अनुकरणीय है। उनकी यह यात्रा यह साबित करती है कि सच्ची सेवा का मूल्य सम्मान या पहचान में नहीं, बल्कि उन मुस्कानों में है, जो किसी की मदद करने से चेहरे पर आती हैं ।
अपने समाज सेवा के इस सेवा कार्य की प्रेरणा वे भोजपुरी समाज के सामाजिक सेवा कार्य और इस हेतु समाज के सभी सदस्यों के निष्ठा और निःस्वार्थ सेवा को देते हैं ।

मुख्य संपादक यशवंत खेडुलकर

सह सम्पादक शैलेन्द्र चिटनवीस जशपुर जिला

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