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लॉरेंस बिश्नोई अपराध से दूर रहने वाले लड़कों को बना रहा शार्प शूटर, कैसे जुटाए 700 सुपारी किलर

नई दिल्ली. महाराष्ट्र के सीनियर नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या में लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम सामने आ रहा है। अब तक पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है तो खंडन भी नहीं किया है। वहीं लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने तो इसकी जिम्मेदारी ही ले ली है। इस हत्याकांड को सलमान खान को धमकी से भी जोड़कर देखा जा रहा है। इसके चलते यह कांड हाईप्रोफाइल हो गया है और पुलिस मुंबई से लेकर दिल्ली तक तफ्तीश में जुटी है। इस बीच जानकारी सामने आई है कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग के काम करने का अलग ही तरीका है और पूरे देश में करीब 700 शार्प शूटर उसने खड़े कर लिए हैं।

लॉरेंस बिश्नोई गैंग की पड़ताल कर रहे कुछ पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह गैंगस्टर अलग ही तरीके से काम करता है। वह आमतौर पर ऐसे लड़कों को अपने साथ लाता है, जिनका पिछला कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं होता। इनके जरिए ही वह बड़ी से बड़ी हत्याओं को अंजाम दिलाता है, जिससे पुलिस को कोई शक नहीं होता और ये लोग आसानी से मूवमेंट कर पाते हैं। इन लड़कों में उन्हें शामिल किया जाता है, जो जेल में कुछ समय पहले ही आए हों। इसके बाद उनकी मीटिंग लॉरेंस बिश्नोई के गुर्गों से होती है और उन्हें टारगेट सौंपे जाते हैं।

गुजरात की साबरमती जेल में लॉरेंस बिश्नोई खुद बीते साल से ही बंद है। इसके अलावा उसकी गैंग के कई लोग राजस्थान, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा की जेलों में कैद हैं। इनके जरिए वह कोई अपराध अंजाम नहीं दे सकता। इसलिए नई पौध खड़ी करता है और उन लोगों को चुनता है, जिनके नाम पर पहले से कोई केस न हों। एनआईए सूत्रों का कहना है कि इसके लिए उन लोगों को भी कई बार चुना जाता है, जो बेरोजगार हों। इन्हें मोटी रकम का लालच मिलता है या फिर विदेश में कहीं सेटल कराने का झांसा दिया जाता है। ऐसा कई लोगों के साथ किया भी गया है और वे कनाडा जैसे देशों में रह रहे हैं।
इस साल दो और कांड कर चुका है लॉरेंस बिश्नोई गैंग

बाबा सिद्दीकी की हत्या के लिए भी इसी पैटर्न का इस्तेमाल हुआ और नए लोगों को इसके लिए चुना गया। लॉरेंस बिश्नोई गैंग कुख्यात होता जा रहा है और पूरे देश में खौफ का दूसरा नाम बन चुका है। इसी साल की शुरुआत में हरियाणा की पार्टी इनेलो के नेता नफे सिंह राठी की हत्या हुई थी। इसके अलावा गुरुग्राम में बुकी सचिन मुंजाल मारा गया था। इन कत्लों के पीछे भी बिश्नोई गैंग का ही नाम सामने आया था। यही नहीं लॉरेंस बिश्नोई के करीबी गुर्गे रोहित गोदारा ने इसकी जिम्मेदारी भी ली थी, जो फिलहाल कनाडा में बसा हुआ है।

मुख्य संपादक यशवंत खेडुलकर

सह सम्पादक शैलेन्द्र चिटनवीस जशपुर जिला

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