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राजनांदगांव के दो प्रमुख तालाबों के बीच स्थापित है यह मंदिर, शक्ति उपासना के महापर्व पर जरूर करें यहां दर्शन

राजनांदगांव शहर में प्राचीन शीतला मंदिर स्थित है. रानी सागर बूढ़ा सागर तालाब के पास यह मंदिर स्थापित है. जहां माता शीतला की पूजा अर्चना की जाती है. राजाओं के जमाने से यह मंदिर स्थापित है. तालाबों के बीच में यह मंदिर विद्यमान है. जहां बैरागी वैष्णव राजाओं द्वारा पूजा अर्चना की जाती थी. माता की पूजा अर्चना करने दूर-दूर से भक्त आते हैं. यहां नवरात्र पर्व पर विशेष पूजा अर्चना कि जाती है ज्योति कलश की स्थापना होती है नौ दिनों तक भजन कीर्तन का आयोजन होता है. दूर दूर से भक्त यहां पहुंचते है.

 

माता शीतला राजनांदगांव की आराध्य देवी है और कुलदेवी है. जहां विभिन्न शुभ अवसर शादी, छठी ,मांगलिक कार्यक्रमों में प्रथम निमंत्रण मां शीतला को दिया जाता है और बड़ी संख्या में लोग पूजा अर्चना करने यहां पहुंचते हैं. बैरागी राजाओं के द्वारा इस मंदिर की स्थापना की गई थी. इसके बाद से ही यहां विधि विधान से पूजार्चना की जाती है. हर पर्व पर माता शीतला की दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचते हैं. माता हर मनोकामना पूर्ण करती है. दूर-दूर से भक्त माता के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं और विधि विधान से पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लेते हैं. राजाओं के समय से यह मंदिर स्थित है. इसके साथ ही शहर के दो प्रमुख तालाबों के बीच यह मंदिर स्थापित है.

 

शहर का प्राचीन मां शीतला मंदिर

राजनांदगांव शहर का प्राचीन शीतला माता मंदिर अपने आप में खास है. यह मंदिर दो तालाबों के बीच स्थित है. बैरागी राजाओं के समय से यह मंदिर स्थापित है. जहां विधि विधान से पूजा अर्चना करने से हर मनोकामना पूर्ण होती है. बड़ी संख्या में भक्त यहां आते हैं और माता से मन्नत करते हैं. यहां एक ही मंदिर परिसर में माता शीतला मां काली,बाबा भोलेनाथ,हनुमानजी और साईं बाबा के दर्शन एक साथ होते हैं.

 

मंदिर की अपनी एक अलग मान्यता

शीतला माता राजनांदगांव की आराध्य कुलदेवी माता हैं. हर मांगलिक कार्यक्रम के दौरान माता की पूजा अर्चना की जाती है और प्रथम निमंत्रण माता शीतला को दिया जाता है. इसके साथ ही दोनों नवरात्र पर्व पर ज्योति कलश की स्थापना भी की जाती है और 9 दिनों तक विधि विधान से पूजा अर्चना मंदिर में की जाती है. इसके साथ ही दीपावली के दिन भी विशेष पूजा अर्चना होती है और भक्तों को मंदिर में पहुंचकर माता के विशेष पूजा अर्चना करने का लाभ मिलता है.

मुख्य संपादक यशवंत खेडुलकर

सह सम्पादक शैलेन्द्र चिटनवीस जशपुर जिला

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