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दल-दलदल और कमल से लेकर आदर्श पत्नी की खोज तक, अटल बिहारी वाजपेयी की हाजिरजवाबी के 5 किस्से

भारत रत्न व पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की आज जयंती है। इस मौके पर पूरा देश उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है और अपने महान नेता की याद डूबा है। अटल जी की यह 99वीं जयंती है और अगले साल 2024 में उनकी जन्म शताब्दी होगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्व पीएम को पुष्पांजलि अर्पित करने सदैव अटल स्मारक पहुंचे। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी मौजूद रहे। वाजपेयी का सेंस ऑफ ह्यूमर ऐसा था कि वो अपनी बातों से सामने वाले को एकदम लाजवाब कर देते थे। आज हम आपको अटल जी की हाजिरजवाबी के ऐसे ही 5 मशहूर किस्से सुना रहे हैं…

अटल बिहारी वाजपेयी 1957 में पहली बार सांसद बने। सदन में एक बार जवाहरलाल नेहरू ने जनसंघ की आलोचना कर दी। इस पर अटल ने कहा, ‘मैं यह जानता हूं कि पंडित जी रोज शीर्षासन करते हैं। वह शीर्षासन करें, मुझे कोई आपत्ति नहीं है। मगर मेरी पार्टी की तस्वीर उलटी न देखें।’ वाजपेयी की यह बात सुनकर नेहरू भी खूब हंसे।

दल, दलदल और कमल वाला किस्सा
पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को लेकर ‘दल, दलदल और कमल’ वाला किस्सा बहुत लोकप्रिय है। दरअसल, पत्रकार रजत शर्मा अपने टीवी शो आपकी अदालत में वाजपेयी जी का इंटरव्यू ले रहे थे। इस दौरान उन्होंने उनसे कहा, ‘सुनने में आ रहा है कि भाजपा में 2 दल हैं। एक नरम दल और दूसरा गरम दल है। एक वाजपेयी का दल है और एक आडवाणी का दल है।’ इसका जवाब देते हुए वाजपेयी ने कहा, ‘जी नहीं, मैं किसी दलदल में नहीं हूं। मैं तो औरों के दलदल में अपना कमल खिलाता हूं।’

वाजपेयी जी ने शादी नहीं की। शादी न करने को लेकर जब उनसे सवाल हुआ तो बड़ा दिलचस्प जवाब मिला। उन्होंने कहा था, ‘मैं अविवाहित हूं…’ फिर अपना चिर-परिचत विराम लेकर बोले, ‘लेकिन कुंवारा नहीं।’ एक पार्टी में महिला पत्रकार ने अटल जी के अविवाहित रहने को लेकर बार-बार सवाल किया। इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा, ‘आदर्श पत्नी की खोज में।’ इस पर पत्रकार ने कहा, ‘क्या वह मिली नहीं।’ वाजपेयी थोड़ा रुककर बोले, ‘मिली तो थी लेकिन उसे भी आदर्श पति की तलाश थी।’

साल 2004 की बात है। अटल जी बिहार में चुनावी सभा को संबोधित करने गए थे। भाषा के इस्तेमाल में माहिर वाजपेयी ने मंच पर आकर बिहार से अपना रिश्ता जोड़ दिया। उन्होंने कहा, ‘मैं अटल हूं और बिहारी भी हूं।’ यह सुनकर रैली में मौजूद जनता हंसने लगी और जमकर तालियां पीटीं।

साल 1984 में इंदिरा गांधी की मौत के बाद हुए चुनाव में कांग्रेस की आंधी देखने को मिली। कांग्रेस ने 401 सीटों पर जीत का परचम फहराया। इस पर लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि ये लोकसभा नहीं, शोकसभा के चुनाव थे। कांग्रेस की मजूबती को देखते हुए उसे हराने के लिए गठबंधन जरूरी हो गया था। वीपी सिंह भाजपा से गठबंधन करना नहीं चाहते थे। मगर, कुछ साथी नेताओं के समझाने पर वह सीटों के समझौते के लिए सहमत हो गए। चुनाव प्रचार के दौरान एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वाजपेयी और वीपी सिंह दोनों मौजूद थे। इस पत्रकार ने वाजपेयी से पूछा, ‘इलेक्शन के बाद अगर बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी तो क्या आप प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी लेने को तैयार होंगे?’ यह सुनकर वाजपेयी थोड़ा मुस्कुराए और कहा, ‘इस बारात के दूल्हा वीपी सिंह हैं।’

मुख्य संपादक यशवंत खेडुलकर

सह सम्पादक शैलेन्द्र चिटनवीस जशपुर जिला

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