छत्तीसगढ़

राशन घोटाले से क्या अब पर्दा हटेगा,जिसकी शिकायत डा.रमनसिंह ने केन्द्र से की थी

रायपुर। पिछले पांच सालों में हुए राशन घोटाले की प्रमाणित शिकायत वर्तमान में विधानसभा अध्यक्ष डा.रमनसिंह के द्वारा केन्द्रीय खाद्य मंत्री पीयूष गोयल से की गई थी तब केन्द्र से टीम भी जांच के लिए आई थी,तब खाद्य संचालनालय के कुछ ओहदेदार अधिकारियों ने गोलमाल जानकारी पेश कर दी थी,जो कि वास्तविक नहीं है। कुछ पर कार्रवाई होने की जानकारी केन्द्र से मिली,कुछ प्रक्रिया में होने की बात कही गई। चूंकि अब राज्य में भाजपा की सरकार है.

सवाल उठने लगे हैं कि क्या अब पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच होगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी? 13हजार राशन दुकानों में से जिन राशन दुकानों में बचत घोटाला हुआ है उसको दबाने के लिए जो खेल किया जा रहा है उसकी जानकारी मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्रीद्वय को भी दी जा रही है। भाजपा सरकार के पिछले कार्यकाल के दौरान राज्य की जो सार्वजनिक वितरण प्रणाली देश में नंबर एक पर थी वो आज 18 नंबर तक खिसक चुकी है,आखिर क्यों समझा जा सकता है।
राशन घोटाले से क्या अब पर्दा हटेगा,जिसकी शिकायत डा.रमनसिंह ने केन्द्र से की थी

छत्तीसगढ़ में डा.रमन सिंह 2003 से 2018 तक राज्य के मुख्यमंत्री थे। उनके राज में प्रदेश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली में कम्प्यूटर का शानदार ढंग से उपयोग कर राशन कार्ड धारकों को हर महीने चांवल सहित अन्य सामग्री देने की व्यवस्था की गई थी। ये प्रणाली बहुत अच्छी थी। सेंट्रल अलॉटमेंट के लिए खाद्य संचालनालय को जिम्मेदारी दी गई थी कि दो महीने पूरा कोटा दिया जाए और तीसरे महीने बीते दो महीने में बचत को घटा कर तीसरे महीने बचा कोटा दिया जाए। इस व्यवस्था के लिए राज्य के हर राशन दुकानों के द्वारा घोषणा पत्र जमा किया जाता था।
लेकिन 2018 में सत्ता परिवर्तन के बाद संचालनालय के एक अधिकारी ने सारे नियम कायदे को ताक में रख दिया,ऐसा क्यो किया गया बताने की जरूरत नहीं। राशन दुकानों में चांवल शक्कर सहित अन्य खाद्यान बचे होने के बाद भी हर महीने पूरा अलॉटमेंट दिया जाता रहा। महज साढ़े तीन साल में प्रदेश की 13हजार राशन दुकानों में से 5 हजार राशन दुकानों के घोषणा पत्र में 600 करोड़ रुपए का खाद्यान्न केवल कागज में रह गया। जिन राशन दुकानों के गोदाम सिर्फ 250-300 क्विंटल क्षमता के थे उनमें 500 से 1500 क्विंटल चांवल बचा दिखा।
तब तत्कालीन पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विधान सभा अध्यक्ष डा रमन सिंह ने प्रमाणित रूप से दस्तावेजी साक्ष्य के साथ मार्च 2023में विधानसभा में मुद्दा उठाया था। तब सदन में भी सही जानकारी पेश नहीं की गई। राज्य सरकार से न्याय न मिलने पर डा रमन सिंह ने केंद्रीय खाद्य मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिख कर जांच की मांग की थी। तब खाद्य संचालनालय के अधिकारी केंद्र को भी फर्जी आंकड़े देकर बचने की कोशिश कर रहे थे। इसका खुलासा खाद्य अधिकारी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रमेश चंद्र गुलाटी ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी सहित केंद्रीय खाद्य मंत्रालय को पत्र लिख कर अगस्त 2023में जांच की मांग की थी। गुलाटी ने पत्र में बचत राशन घोटाले के लिए अपर संचालक को जिम्मेदार बताते हुए उन्हें हटा कर जांच की मांग की है।
जैसे कि मालूम हो भारतीय जनता पार्टी के शासन काल में छत्तीसगढ़ सार्वजानिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश 2017 बनाया था। इस आदेश में राशन दुकानों में स्टॉक और वितरण रजिस्टर का प्रारूप खाद्य संचालक संचालनालय द्वारा बनाया जाना था। लेकिन पिछले 5 साल में इस कार्यालय ने प्रारूप नहीं बना कर दिया जिसके कारण किसी भी राशन दुकान में स्टॉक और वितरण रजिस्टर नहीं रखा गया। ये सब घोटाले को जन्म देने के लिए किया गया था।
राशन घोटाले से क्या अब पर्दा हटेगा,जिसकी शिकायत डा.रमनसिंह ने केन्द्र से की थी

मामले की शिकायतकर्ता खाद्य अधिकारी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रमेश चंद्र गुलाटी के अनुसार –
* राशन बचत घोटाले को छुपाने के लिए 13 हजार राशन दुकानों के घोषणा पत्र को विभाग के पोर्टल से हटा दिया गया है।
* जिन राशन दुकानों में हजारों क्विंटल चांवल शक्कर का घोटाला हुआ है उन्हे बिना किसी लिखित आदेश के बाजार से चांवल शक्कर खरीद कर रखने का गोपनीय मौखिक आदेश दिया गया। सरकारी आदेश में केवल नागरिक आपूर्ति निगम ही चांवल आदि प्राप्त किया जा सकता है। गुलाटी का कहना है कि किसी भी राशन दुकान जहां बचत घोटाला हुआ है वहां फर्जी खरीदी की गई है। न तो क्वालिटी युक्त चांवल खरीदा गया है और न ही बिल ही लिया गया है। सारा फर्जीवाड़ा है।
* जब रिकवरी कर ली गई थी तो उस खाद्यान्न शक्कर का कोटा संचालनालय से घटाया जाना था वह नहीं घटाया गया हैं और लगातार पूरा कोटा दिया गया है
* राशन दुकानों से घोटाले किए गए चांवल शक्कर के लिए आर आर सी ही जारी किया जा सकता था। उसमे आज तक कोई वसूली की गई है। केवल कागजी फर्जीवाड़ा किया जा रहा है।
* केंद्र सरकार के खाद्य मंत्रालय को 22 राशन दुकानों के विरुद्ध एफ आई आर की जानकारी दी गई है। किसी में भी गिरफ्तारी नही हुई है।
* जिन राशन दुकानों को बर्खास्त या निलंबित किया जाना बताया गया है उनका संबंध घोटाले से नहीं है। रमेश चंद्र गुलाटी ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी है और घोटाले के मामले को जन जन तक पहुंचा कर घोटाले करने वाले अधिकारी की गिरफ्तारी तक संघर्ष करने की बात कही है।
मामले को लेकर संबंधित विभाग से भी संपर्क करने का प्रयास किया गया पर हो नहीं पाया,यदि वे भी अपना पक्ष वास्तविक प्रमाण के साथ देते हैं तो उसका भी प्रकाशन किया जायेगा।

मुख्य संपादक यशवंत खेडुलकर

सह सम्पादक शैलेन्द्र चिटनवीस जशपुर जिला

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