भ्रष्टाचार की आग में सुलग रहे जंगल.. दावानल की चपेट में रायगढ़ की पहाड़ियां…वनविभाग की लापरवाह कार्यशैली से इस बार भी जलेंगे जंगल खतरे में वन्य जीवन..वनविभाग की प्रासंगिकता केवल काग़जों पर..!

रामपुर , परसदा और चिराईपानी के पहाड़ी जंगलों में भीषण आग…
जंगलों को आग से बचाने के लिए “फायर लाइन” बनाने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए…
वन विभाग की लापरवाही से इस बार भी जंगल और जानवर ख़तरे में…
रायगढ़ वन मंडल में वन संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद जंगलों में आग और वन्यजीवों के हानि की स्थिति लगातार बनी हुई है। वन विभाग के भारी-भरकम अमले और बड़े बजट के बावजूद हर साल वही कहानी दोहराई जाती है—जंगल जलते हैं और वन्यजीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाता है।
ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत में ही रायगढ़ वन परिक्षेत्र अंतर्गत रामपुर , परसदा और चिराईपानी के पहाड़ी जंगलों में भीषण आग लगने से बड़ा वन क्षेत्र प्रभावित हुआ। कई क्षेत्रों के जंगल भीषण आग की चपेट में आ गए हैं। आग की लपटों ने बड़े वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचाया है। सैकड़ों पेड़-पौधे जलकर नष्ट हो गए हैं और जंगलों में रहने वाले कई छोटे-बड़े वन्यजीवों के जीवन पर संकट गहरा गया है। जंगलों में रहने वाले जीव-जंतु अपने प्राकृतिक आवास और भोजन के स्रोत खोने के कारण सुरक्षित स्थानों की तलाश में भटकने को मजबूर हो जाते हैं।
गौर करने वाली बात यह है कि कुछ समय पहले ही जंगलों को आग से बचाने के लिए “फायर लाइन” बनाने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे। हर वर्ष जंगलों में आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि आखिर इन योजनाओं पर खर्च किए गए करोड़ों रुपये का वास्तविक लाभ क्यों नहीं मिल पा रहा है।
वन विभाग के पास कर्मचारियों और संसाधनों की कमी भी नहीं है, इसके बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं होने के कारण आग फैलकर बड़े क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लेती है। यदि समय रहते सतर्कता बरती जाए और प्रभावी निगरानी व्यवस्था लागू की जाए, तो जंगलों को इस तरह की घटनाओं से काफी हद तक बचाया जा सकता है।



