संपादकीय

“ये रायगढ़ पुलिस है, सब जानती है” सवालों के घेरे में व्यवस्था.? उम्मीदों की रोशनी में रायगढ़..!अब मिलेगा न्याय..! कि फिर एकबार ” आधी अधूरी विवेचना” बनेगी रायगढ़ के दाऊदों की ढाल..!

वकील,पंडित, क्रेशर मालिक. .. और अब रोहित देवांगन असमय बुझ गए कई घरों के चिराग़…

“ये रायगढ़ पुलिस है, सब जानती है”—यह वाक्य हालिया पुलिस कार्रवाइयों को लेकर चरितार्थ हो रहा है। आज एवं हाल के दिनों में हुई कबाड़ व्यवसाय, देह व्यापार,गुण्डागर्दी, ऑनलाइन सट्टा खाइवाली जैसे अवैध व अनैतिक धंधों पर जिस तरह से सिलसिलेवार कार्रवाई हुई है, उसने एक ओर जहां कानून के प्रति भरोसा जगाया है, वहीं दूसरी ओर कई सुलगते सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
इस बात में कोई दो राय नहीं हो सकती कि ये अवैध धंधे रातों-रात नहीं पनपे।इन्हें कुकुरमुत्तों की संज्ञा भी नहीं दी जा सकती, इनकी जड़ें वर्षों पुरानी हैं—इतनी गहरी कि बिना स्थानीय जानकारी, संरक्षण या अनदेखी के इनका फलना-फूलना असंभव प्रतीत होता है। ऐसे में जब अचानक परत-दर-परत इनका भंडाफोड़ होने लगे, तो आम जन मानस के मन में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या पहले सब कुछ दिखाई नहीं देता था? या दिखता था, पर देखा नहीं जाता था?
नए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के पदभार संभालने के बाद जिस तेजी और दृढ़ता से कार्रवाइयाँ सामने आई हैं, उसने यह स्पष्ट किया है कि इच्छाशक्ति हो तो व्यवस्था भी सक्रिय हो सकती है। यह सक्रियता स्वागतयोग्य है, लेकिन साथ ही यह पूर्व की निष्क्रियता पर सवालिया निशान भी लगाती है। क्या इससे पहले पुलिस और अवैध कारोबारियों के बीच कोई सांठगांठ थी? या फिर तंत्र सुस्त था, जवाबदेही शून्य थी या फ़िर “हफ्ता और महीना” साथ में “मुफ़्त की तनख्वाह”।
य़ह भरोसा भी तब बहाल होगा जब यह स्पष्ट होगा कि यह अभियान आने वाले समय में अनवरत तथा व्यक्ति-विशेष तक सीमित न रहे। रायगढ़ पुलिस के लिए यह एक अवसर भी है और परीक्षा भी—अवसर, वर्षों से जमी गंदगी साफ करने का; और परीक्षा, यह सिद्ध करने की कि कानून का राज किसी चेहरे पर निर्भर नहीं करता।
पुलिस के कार्य ऐसे हों कि कानून का भय अपराधियों में और विश्वास नागरिकों में हमेशा होना चाहिए। यदि यह अभियान निरंतरता, पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ आगे बढ़ता है, तो रायगढ़ न केवल अवैध धंधों से मुक्त होगा, बल्कि पुलिस-जनता के रिश्ते में भी नई मजबूती आएगी इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

मुख्य संपादक यशवंत खेडुलकर

सह सम्पादक शैलेन्द्र चिटनवीस जशपुर जिला

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