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छत्तीसगढ़ के लोक संगीत में जो विशेषता, भिन्नता है,वह भारत के अन्य राज्यों में नहीं…तिवारी


मुंबई  इंटरनेशनल फाऊंडेशन फॉर फाइन आर्ट्स मुंबई द्वारा आज  एन.सी.पी. ए.नरीमन पॉइंट में लोक संगीत परंपराएं शीर्षक पर आधारित राष्ट्रीय सेमिनार में बोलते हुए नगर के वरिष्ठ लोक कलाकार राष्ट्रीय संगीत नाटक अकादमी तथा राज्य लक्ष्मण मस्तुरिया सम्मान से सम्मानित राकेश तिवारी ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लोक संगीत में जो विशेषता, विविधता,और भिन्नता है ऐसा भारत के कोई अन्य राज्यों में देखने को नहीं मिलता . श्री तिवारी ने सभी लोक विधा की जानकारी देते हुए कर्मा ,ददरिया , नाचा,पंथी,डंडा,काया खंडी भजन के अलावा संस्कार गीत  को गाकर भी गा कर सुनाया. जिसे सुनकर उपस्थित सुधीजन मंत्र मुग्ध हो गए .संगतकार के रूप में आर्गन पर डॉ. पुरुषोत्तम चन्द्राकर, ढोलक पर मनीष लदेर, घुँघरू पर हेमलाल पटेल रहे.कार्यक्रम में पद्मश्री शेखर सेन पद्मश्री मालनी अवस्थी ,गायिका सुश्री चंदन तिवारी ,सुरभि फेम सिद्धार्थ काक,पार्श्व गायिका छाया गांगुली , एनसीपी की प्रोग्राम प्रमुख सुवर्ण लता राव सहित बड़े संख्या में दर्शक उपस्थित रहे.

मुख्य संपादक यशवंत खेडुलकर

सह सम्पादक शैलेन्द्र चिटनवीस जशपुर जिला

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