#छत्तीसगढ़ी भाषा
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कोन्दा भैरा के गोठ – व्यंग्यकार सुशील भोले
–बधाई हो जी भैरा तुंहर सरकार फेर लहुट आइस.-तहूं ल बधाई संगी कोंदा.. अब लागथे फेर इहाँ के भाखा साहित्य…
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लोक संस्कृति के ढेलवा-रहचुली मेला- मड़ई..
छत्तीसगढ़।छत्तीसगढ़ के संस्कृति म मेला-मड़ई मनके घलोक महत्वपूर्ण स्थान हे। मड़ई के शुरूआत जिहां देवारी/मातर के दिन मड़ई जगई ले…
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कोन्दा भैरा के गोठ – व्यंग्यकार सुशील भोले..
–नेता मन के जीव ह कहूँ सरकारी संसाधन म गुलछर्रा उड़ियाए ले थोक-बहुत बॉंचे अस जनाथे, त फोटो खिंचवा के…
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कोन्दा भैरा के गोठ -सुशील भोले..
–हमर देश के संवैधानिक व्यवस्था म केंद्र अउ राज्य के बीच संबंध ल गुरतुर बनाए खातिर केंद्र द्वारा राज्यपाल के…
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कोन्दा भैरा के गोठ – सुशील भोले
–जेठौनी जोहार जी भैरा.-जोहार जी कोंदा.. यहा काला-काला धर के जावत हस जी संगी?-या.. ए सब टूटहा चरिहा, झेंझरी, सूपा-उपा…
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कोन्दा भैरा के गोठ – सुशील भोले
–हमर इहाँ लइका के जनम धरे के तुरतेच बाद ओकर संग जुड़े गर्भनाल ल तुरते काटे के परंपरा हे जी…
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कोन्दा भैरा के गोठ – व्यंग्यकार सुशील भोले..
–जे मन कोनो विषय म पीएचडी कर लेथें, ते मनला वो विषय के संगे-संग सबोच विषय के विद्वान मान के…
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कोन्दा भैरा के गोठ – सुशील भोले
–हमर गाँव म तो मातर के दिन ही संझौती बेरा मड़ई के आयोजन हो जाथे, फेर धमतरी क्षेत्र म गंगरेल…
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कोन्दा भैरा के गोठ – व्यंग्यकार सुशील भोले..
–एक तो हमर इहाँ लोगन ल बीमारी ले बचाए बर बने गतर के न तो दवई-पानी मिलय अउ न बने…
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कोन्दा भैरा के गोठ – व्यंग्यकार सुशील भोले..
–हमर देश के राजनीति म किसान मन बर कभू ठोसहा नीति बना के उनला सत्ता पाए के केंद्र म नइ…
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