पुसौर तहसील में फाइलों के गुम होने और फिर मिलने के अफ़साने – बाबू बदले अधिकारी बदले लेकिन तरीके वही पुराने…राजस्व विभाग का एक ऐसा कार्यालय जहां सिर्फ पैसा और पॉवर बोलता है!!

छात्रावास के भृत्य को न्यायालयीन कार्यो में किसकी अनुमति से रखा गया है..?
दुर्भाग्यवश पिछले कुछ वर्षों से तहसीलदार का पद आचरण की वज़ह से ज्यादा विवादित रहा है भले ही वह महिला अधिकारी ही क्यों न रही हो…
नक्शा बंटाकन जैसे सामान्य प्रकरण में सारी प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद भी तहसीलदार को रिश्वत न मिलने के कारण तीन वर्षों से चक्कर लगाते किसान का प्रकरण खारिज कर दिया गया…
पुसौर (रायगढ़)।
पुसौर तहसील कार्यालय की अव्यवस्था और भ्रष्टाचार के अफ़साने इतने पुराने है कि इनकी चर्चा भी अब बेमानी हो चली है।आम पक्षकारों का कहना है कि यहां काम करवाने के लिए न केवल बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं, बल्कि कई बार उनकी फाइलें रहस्यमयी तरीके से “गुम” भी हो जाती हैं।
यहां हमेशा से यही आरोप लगता आया है कि तहसील कार्यालय में जमीन संबंधी मामलों नामांतरण, बंटवारा,सीमांकन,और अन्य राजस्व प्रकरणों की फाइलें अक्सर गायब हो जाती है। जब आवेदक बार-बार पूछताछ करता है तथा “सेवा शुल्क” अदा करता तो कुछ दिनों बाद वही फाइल अचानक “मिल” जाती है। कई मामलों में कर्मचारियों द्वारा पहले फाइल खोजने में असमर्थता जताई जाती है, फिर बाद में किसी “व्यवस्था” के बाद वही फाइल रिकॉर्ड के बण्डल में या किसी अन्य टेबल से बरामद हो जाती है।
पुसौर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव के कई किसानों और आम नागरिकों का कहना है कि जमीन से जुड़े छोटे-छोटे मामलों के समाधान के लिए भी उन्हें महीनों कई बार वर्षों तक कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। छोटे-छोटे कार्यों के लंबित रखे जाने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है एवं समय के साथ साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है।
लोगों का यह भी आरोप है कि अधिकारी और बाबुओं की मिलीभगत होने के कारण यहां शिकायत के उपरांत भी कार्रवाई नहीं होती है लेकिन जब सत्ता पर सवाल खड़ा होता है तो एक साथ एक नहीं दो दो तहसीलदार का निलंबन भी जनता ने देखा है।



