एक्सक्लुसिव न्यूज़

रक्षक बने भक्षक:- जंगल लकड़ी तस्करों के हवाले, जानवर शिकारियों के, अब बची भूमि! वह भी भू माफियाओं के हवाले…!रसूख का दम या चांदी का जूता—किसके सहारे वन भूमि पर कब्ज़ा..? मुनारा तोड़कर निजी भूमि दिखाने का प्रयास..पाँच दिन पहले मुनारा लगाने पहुंची  वनविभाग की टीम किसके दबाव में बैरंग लौटी…!

क्या है मामला:- पेट्रोल पंप निर्माण के लिए ग्राम बड़े रामपुर में सर्किट हाउस–उर्दना मार्ग पर वन भूमि पर कब्ज़े की तैयारी..!

रायगढ़। सर्किट हाउस से उर्दना जाने वाले मुख्य मार्ग से सटी वन भूमि पर कथित रूप से अवैध कब्ज़ा कर पेट्रोल पंप स्थापित करने की तैयारी का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों के अनुसार संबंधित भूखंड पर हाल ही में बड़े पैमाने पर खुदाई कर मलबा डाला गया है।
मौका मुआयना करने से स्पष्ट देखा जा सकता है कि पेट्रोल पंप के लिए प्रस्तावित भूमि को सड़क से लगी हुई दिखाने और निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से वन विभाग द्वारा चिह्नीकरण हेतु लगाए गए सीमा स्तंभ (मुनारे) को भी तोड़ दिया गया है, जो एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
मौके पर मिट्टी की खुदाई, पत्थर और गिट्टी के ढेर स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं, जिससे संकेत मिलता है कि भूमि समतलीकरण का कार्य जारी है। यह क्षेत्र सर्किट हाउस–उर्दना मार्ग से लगा हुआ है। वन भूमि से सटी आदिवासी भूमि पर भी कब्ज़े की आशंका व्यक्त की जा रही है।
नियमों के अनुसार वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में आने वाली भूमि पर बिना वैधानिक अनुमति किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य प्रतिबंधित है।सूत्रों के अनुसार इस प्रकार के मामलों में भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 26 के तहत कार्रवाई की जा सकती है साथ ही सीमा स्तंभ तोड़ने और भूमि पर अवैध कब्ज़े के मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 447 (आपराधिक अतिक्रमण) और धारा 427 (संपत्ति को नुकसान पहुंचाना) के तहत भी मामला दर्ज किया जा सकता है।

वन विभाग द्वारा अतिक्रमणकारी व्यक्ति के विरुद्ध  किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं किया जाना कई सवाल खड़े करता है।  यदि यही कृत्य किसी आम व्यक्ति द्वारा किया गया होता, तो अब तक उस पर सख्त कार्रवाई करते हुए उसे जेल तक भेज दिया गया होता।इस पूरे मामले को लेकर रायगढ़ के कुछ जागरूक पर्यावरण प्रेमी नागरिकों ने वनविभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से मीडिया के माध्यम से मांग की है कि जल्द से जल्द वन भूमि से अतिक्रमणकारी को बेदखल करते हुए वनभूमि संरक्षित करें एवं मुनारा पुनः स्थापित करें ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो पाए अन्यथा इस पूरे मामले में संलिप्त अधिकारी कर्मचारियों की उच्चस्तरीय शिकायत की जाएगी और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की माँग की जाएगी।

मुख्य संपादक यशवंत खेडुलकर

सह सम्पादक शैलेन्द्र चिटनवीस जशपुर जिला

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button