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कोन्दा भैरा के गोठ – सुशील भोले

सत्ता म आए बदलाव के संग शासन-प्रशासन के कतकों काम-काज म घलो बदलाव देखे बर मिल जाथे जी भैरा.
-हव जी कोंदा ए बात तो हे. दलगत राजनीति के ए ह दुखद रूप आय, जेला सबो राज अउ दल म देखे जाथे.
-अभी देखना इहाँ गोबर खरीदी चलत रिहिसे, तेमा गरीब परिवार के कतेक माईलोगिन मनला रोजगार मिलत रिहिसे, गोबर के दीया, गोकाष्ठ, पेंट, पुट्टी सब बनत रिहिसे, फेर अब गोबर खरीदी बंद करे के आदेश के मिलते जम्मो महिला समूह मन के आगू म रोजी-रोटी के संकट जनावत हे.
-हव जी ए बपरी मनला कांग्रेस-भाजपा से का लेना-देना.. इन तो जॉंगर भर कमाथें तब कहूँ जाके घर के चुल्हा म आगी सिपचा पाथें.
-वइसे अभी तो इनला मौखिक आदेश भर मिले हे, लिखित आदेश के मिलते पूरा राज भर के हजारों महिला समूह के आगू म अंधियारी छा जाही.
-सही आय जी.. अउ एकरे संग इहाँ के गोबर दीया ले भगवान के धाम ह देवारी परब म जगमगाए रिहिसे तइसने कतकों गरब करे के लाइक खबर मन घलो बुता जाहीं.

मुख्य संपादक यशवंत खेडुलकर

सह सम्पादक शैलेन्द्र चिटनवीस जशपुर जिला

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