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Exclusive:-  “भक्ति की जमीन पर लालच का कब्ज़ा” – पटवारियों और ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने लिया जमकर लूट का मज़ा… बूढ़ी माई मंदिर ट्रस्ट की 7 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण का जाल, सीमांकन के बाद भी बेदखली पर सवाल…दो दशकों से अब तक बीसियों सीमांकन,लेकिन हर बार अलग-अलग प्रतिवेदन..गेहूँ चुन चुन अलग किए जा रहे घुन बेचारे पिसते जा रहे -भूस्वामी हैरान – कब्ज़ाधारी मार रहे मैदान..पढ़िए “दान की भूमि” पर लूट और लालच की घिनौनी दास्तान…

ऑनलाइन रिकॉर्ड में खसरा नंबर 25/1 गायब कर दिया गया है..

बताया जा रहा है कि 2023 के सीमांकन रिपोर्ट में  जितने अतिक्रमणकारी बताये गये थे उनमें से कुछ को अभी के सीमांकन में क्लीन चिट दी जा रही है..

बुढ़ी माई ट्रस्ट की भूमि की सीमा पर स्थित अन्य खसरा नंबर के भूमि स्वामी हर बार के सीमांकन की कार्यवाही में होते हैं परेशान…

ट्रस्ट की भूमि से सटे वे लोग, जिन्होंने विधिसम्मत तरीके से भूमि क्रय कर डायवर्सन, मौका मुआयना, इश्तेहार, दावा-आपत्ति, राजस्व निरीक्षक प्रतिवेदन तथा विभिन्न विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त किए हैं, वे बार-बार होने वाले सीमांकन से प्रभावित हो रहे हैं…

रायगढ़।
नगर की आराध्य देवी बूढ़ी माई मंदिर ट्रस्ट के नाम दर्ज लगभग 7 एकड़ भूमि पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। राजस्व अभिलेखों और मौके की स्थिति से स्पष्ट है कि ट्रस्ट की भूमि के भीतर अनेक स्थायी निर्माण और अतिक्रमण मौजूद हैं। इनमें सिद्धेश्वर नेत्रालय का एक हिस्सा, अघरिया सदन का संपूर्ण भवन, रुक्मणि विहार कॉलोनी, उसे जोड़ने वाली सड़क, नगर निगम द्वारा निर्मित गार्डन, थाना कोतरा रोड का हिस्सा, साथ ही कई दुकानें एवं आवासीय मकान शामिल बताए जा रहे हैं।
इसी क्रम में बीते सप्ताह से  न्यायालय तहसीलदार रायगढ़ के प्रकरण क्रमांक 9168/2025 (दिनांक 29.10.2025) के तहत बूढ़ी माई मंदिर ट्रस्ट के वर्तमान अध्यक्ष देवेंद्र पांडे सहित अन्य संबंधित पक्षों की उपस्थिति में भूमि का सीमांकन किया जा रहा है। राजस्व विभाग द्वारा गठित संयुक्त सीमांकन दल ने ग्राम दरोगामुड़ा स्थित खसरा नंबर 24/1, 25/1, 36, 37 एवं 52 (कुल रकबा 2.954 हेक्टेयर) का नक्शे के अनुसार मौका-मिलान कर चारों ओर सीमा चिन्ह स्थापित किए।
2023 के सीमांकन प्रतिवेदन में अतिक्रमण की पुष्टि हुई थी :-
आपको बता दें कि तहसीलदार रायगढ़ के आदेश दिनांक 16.01.2023 के संदर्भ में गठित सीमांकन दल द्वारा 30.01.2023, 06.02.2023, 14.02.2023 एवं 21.02.2023 को भी सीमांकन किया गया था। उस दौरान रेलवे ट्रैक, कोसमनारा, कलमी एवं बैकुण्ठपुर सीमा (सरहद), रामबाग के खसरा नंबर 70, 71, 72, ओवरब्रिज तथा कोतरा रोड मुख्य सड़क से मिलान कर सीमांकन किया गया था।
उस प्रतिवेदन में ट्रस्ट की भूमि पर अनेक व्यक्तियों एवं संस्थानों का अवैध कब्जा पाया गया था, जिनमें निजी व्यक्तियों के साथ-साथ थाना कोतरा रोड (0.186 हे.), सिद्धेश्वर नेत्रालय (0.137 हे.), रुक्मणि विहार कॉलोनी (0.342 हे.), नगर निगम द्वारा निर्मित गार्डन (0.180 हे.) तथा अघरिया सदन  जैसे बड़े निर्माण भी शामिल हैं।
सीमांकन के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?
लगातार सीमांकन और प्रतिवेदनों के बाद भी वर्षों से चले आ रहे अवैध कब्जों के विरुद्ध प्रभावी बेदखली कार्रवाई न होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय नागरिकों और ट्रस्ट से जुड़े जानकारों का आरोप है कि ट्रस्ट के पदाधिकारियों की लापरवाही, कथित स्वार्थ और राजस्व विभाग में मिलीभगत के चलते यह बहुमूल्य भूमि धीरे-धीरे अतिक्रमण की चपेट में चली गई।
वैध भूस्वामियों की परेशानी
मामले का एक दूसरा पहलू यह भी है कि ट्रस्ट की भूमि से सटे वे लोग, जिन्होंने विधिसम्मत तरीके से भूमि क्रय कर डायवर्सन, मौका मुआयना, इश्तेहार, दावा-आपत्ति, राजस्व निरीक्षक प्रतिवेदन तथा विभिन्न विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त किए हैं, वे बार-बार होने वाले सीमांकन से प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि केवल बूढ़ी माई मंदिर ट्रस्ट की भूमि से लगे होने के कारण उन्हें हर बार अनावश्यक जांच और परेशानी का सामना करना पड़ता है।
इसके अलावा सीमांकन के दौरान 40–50 वर्ष पुराने प्रणामी मंदिर जैसे स्थायी संरचनाओं को स्थायी संदर्भ बिंदु (पॉइंट) न मानकर हर बार नए पॉइंट तय किए जाने से भ्रम और विवाद की स्थिति बनी रहती है।
“गेहूं के घुन की तरह पिस रहे वैध लोग”
पीड़ित नागरिकों का कहना है कि वे “गेहूं के घुन की तरह पिस रहे हैं”, जहां वास्तविक अतिक्रमणकारियों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, जबकि वैध रूप से भूमि क्रय करने वाले लोग बार-बार संदेह और जांच के दायरे में आ जाते हैं।
अब देखना यह है कि ताजा सीमांकन और पूर्व प्रतिवेदनों के स्पष्ट निष्कर्षों के बाद प्रशासन अवैध कब्जों पर ठोस बेदखली कार्रवाई करता है या फिर यह गंभीर मामला उलझा कर पूर्व की तरह फाइलों में ही दबाकर रख दिया जाएगा एवं अतिक्रमणकारीयों को पुनः अभयदान मिल जायेगा।

मुख्य संपादक यशवंत खेडुलकर

सह सम्पादक शैलेन्द्र चिटनवीस जशपुर जिला

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