बाल विवाह न केवल सामाजिक बुराई बल्कि आपराधिक कृत्य है- डॉ पुरुषोत्तम चन्द्राकर..


बाल विवाह उन्मूलन हेतु जागरूकता संभाग स्तरीय कार्यशाला का आयोजन
18 वर्ष से कम आयु की पत्नी के साथ यौन संबंध बलात्कार के समान है- डॉ. पुरुषोत्तम चन्द्राकर
रायपुर बाल विवाह उन्मूलन हेतु संभाग स्तरीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन न्यू सर्किट हाउस सिविल लाइन रायपुर में बाल विवाह जैसी कुप्रथा को समाप्त करने तथा समाज में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से महिला बाल विकास रायपुर द्वारा जिला कार्यक्रम अधिकारी सुश्री शैल ठाकुर के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम में बाल कल्याण समिति रायपुर के माननीय डॉ. पुरुषोत्तम चन्द्राकर, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी, श्री यशपाल जी, श्रीमती माधुरी शर्मा जिला बाल संरक्षण अधिकारी, संजय निराला बाल संरक्षण अधिकारी गैर संस्थागत देखरेख, सपना सिंह, समाजसेवी विपिन ठाकुर, शशांक शर्मा, अभिमन्यु बारिहा, गोरखनाथ पटेल, रेखा शर्मा, विजय साहू विनोद, एवं रायपुर संभाग के पांच जिला से उपस्थित महिला बाल विकास अधिकारी सुपरवाइजर पुलिस एवं समाज सेवी कार्यकर्ता एनजीओ के लोग उपस्थित रहे।
प्रथम सत्र का संचालन डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर की अध्यक्षता में श्री विपिन ठाकुर एवं शशांक शर्मा विषय विशेषज्ञो द्वारा बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों के भूमिका, पोर्टल में जानकारी अपलोड करने के बारे में बताया गया साथ ही उनके द्वारा बाल विवाह के दुष्परिणामों क़ानूनी प्रावधानों एवं बच्चो के अधिकारों पर विस्तार से चर्चा की गई। द्वितीय सत्र में विपिन ठाकुर ने बाल विवाह के दुष्परिणामों को बताते हुए कहा कि बच्चों में कम उम्र में गर्भावस्था में होने वाली प्रॉब्लम, मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर के बारे में बताया , कुपोषण चक्र के संबंध में विस्तार से बताया।
कार्यशाला में उपस्थित प्रतिभागियों को बाल विवाह के उन्मूलन हेतु डॉ. पुरुषोत्तम चन्द्राकर बाल कल्याण समिति रायपुर द्वारा बाल विवाह रोकने हेतु शपथ दिलाया गया।
अपने उद्बोधन में डॉ. पुरुषोत्तम चन्द्राकर ने बाल विवाह के समूल उन्मूलन के लिए संबोधित करते हुए कहा कि बाल विवाह के रोकथाम हेतु विद्यालयों आंगनबाड़ी केन्द्रों,पंचायत, गैर सरकारी संगठन एनजीओ, युवा समूह और धार्मिक नेताओं की भागीदारी के साथ व्यापक सामुदायिक सहभागिता की आवश्यकता है।
डॉ. पुरुषोत्तम चन्द्राकर ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत 18 वर्ष से कम आयु की पत्नी के साथ यौन संबंध बलात्कार के समान है एक बाल वधू के पति द्वारा यौन हमला लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) 2012 के तहत दंडनीय गंभीर यौन हमला है जिसमें बाल विवाह न केवल एक सामाजिक बुराई बल्कि एक आपराधिक कृत्य भी बन जाता है। कार्यक्रम में महिला सुपरवाईजर एवं परियोजना अधिकारी, बाल कल्याण पुलिस अधिकारी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से लीगल वालंटियर एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के कर्मचारी बृंद अधिकारी गण उपस्थित रहे।
आभार प्रदर्शन श्रीमती माधुरी शर्मा जिला बाल संरक्षण अधिकारी ने किया।




