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कोन्दा भैरा के गोठ – सुशील भोले

ए ह कतका बड़ संजोग आय जी भैरा के काली जे दिन भगवान राम के अयोध्या म प्राणप्रतिष्ठा होइस, ठउका उहिच दिन हमर इहाँ के रामनामी समाज के मन के मेला घलो रिहिसे, जे ह बछर भर म एकेच दिन भराथे.
-इही ल तो भगवान के सच्चा भक्ति अउ वोला स्वीकार करना कहिथें जी कोंदा. जे मनला कभू मंदिर म खुसरे बर तक मना कर दिए रिहिन हें, आज भगवान उनला सउंहे स्वीकार कर लिस.
-हव भई.. जॉंजगीर-चांपा के एक नान्हे गाँव चारपारा के परशुराम ल दलित होए के सेती मंदिर म जावन नइ दे गे रिहिसे, तेकर सेती ए ह बछर 1890 के आसपास रामनामी समाज के स्थापना करे रिहिसे, ए कहिके के भगवान तो सबो जगा हे वोला पाए बर कोनो मंदिर जाए के जरूरत हे ना उहाँ पूजा करे के. अउ मंदिर म नइ जावन दे के विरोध स्वरूप अपन पूरा देंह म ही राम राम गोदवा डरिस. आज ए ह एक पूरा संप्रदाय के रूप धर ले हे, एकर अनुयायी मन अपन शरीर के संगे-संग घर के कोठ मन म घलो राम राम लिखवाए रहिथें. हर बछर भजन मेला के आयोजन करथें, जेमा नवा दीक्षा लेवइया मनला दीक्षा घलो देथें.

मुख्य संपादक यशवंत खेडुलकर

सह सम्पादक शैलेन्द्र चिटनवीस जशपुर जिला

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