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O P चौधरी की Facebook post पर कटा बवाल.. क्या चौधरी जी की ज़मीन खिसक रही है..!क्या होता है जब followers ही बनें आलोचक!OP चौधरी के इस फेसबुक पोस्ट के कमेन्ट सेक्शन में मचा घमासान..ख़बर के अंदर पढ़ें कुछेक समर्थकों के नाम-शब्दशः नसीहत भरे कमेंट्स स्क्रीन शॉट सहित..

बिना शर्त प्रशंसा की जगह तर्क और तुलना आ गई है…


नेता से “इमेज” नहीं, “परिणाम” की अपेक्षा दिख रही है

एक follower ने तो यहां तक कह दिया कि “कमेंट्स देखकर ही चुनावी रुख समझ में आ जाता है।”..

रायगढ़ के विधायक व  छत्तीसगढ़ शासन के वित्त, वाणिज्यिक कर, आवास और पर्यावरण, योजना  मंत्री ओपी चौधरी के फेसबुक पोस्ट
— “पहले और अब के भारत में यही फर्क है! पहले भारत दुनिया के भरोसे था, अब आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के यशस्वी नेतृत्व में दुनिया भारत के विश्वास पर है।”
पर बड़ी संख्या में followers ने अपनी प्रतिक्रियाएँ दीं हैं।

छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी के हालिया फेसबुक पोस्ट पर जिस तरह की प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं, उसने यह सवाल ज़रूर खड़ा कर दिया है कि क्या उनकी राजनीतिक पकड़ में ढील आ रही है? समर्थकों में भी नाराजगी है?
यह पहली बार नहीं है कि किसी नेता की पोस्ट पर आलोचना हुई हो, लेकिन इस बार जो बात अलग दिखती है, वह है आलोचकों की पहचान। बड़ी संख्या में वे लोग, जो खुद को उनके फॉलोअर्स मानते हैं, खुलकर असहमति और नाराज़गी जता रहे हैं।
कुछ कमेंट्स में “फोटो खिंचवाने की उपलब्धि”, “जमीनी हकीकत से दूरी”, “राज्य की हालत पर ध्यान दें” जैसे वाक्य यह संकेत देते हैं कि भावनात्मक समर्थन में दरार पड़ रही है।वहीँ कई टिप्पणियों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय छवि की बातों के मुकाबले स्थानीय मुद्दों महंगाई, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, टैक्स और कर्ज को प्राथमिकता देने की मांग दिखती है।

नीचे प्रमुख कमेंट्स नाम के साथ, बिना किसी बदलाव  प्रस्तुत हैं:
Sunil Thawait
“बधाई”
राज एक अहसास
“हम नेता बेहतरिन हो सकते थे….
लेकिन जब स्वयं के देश के जनता की भलाई त्याग कर…
पार्टी मोह से पीड़ित हो जाए, तो समझिएगा हम देश के सेवक नही रहे, हम अपने पार्टी के सर्वोच्च नेता के गुलाम हो गये। पढ़े लिखे नेताओं का ये हाल है, जो तस्वीरों से समृद्धियां आँक रहे है। भूतकाल की तुलना वर्तमान से कर रहे है। याद रखियेगा वित्तमंत्री जी जब हम अपने विपक्ष की खूबियां और स्वयं की कमियां देख कर, उसे खूबियों में तब्दील कर ले, तो समझो हम सही नेता है। वरना स्वयं के पार्टी की चापलूसी में जनता के सेवक है यह बात भूल बैठेंगे।”
Akash Dutt Mishra
“आपसे बेहतर शिक्षित व्यक्ति है इनके फैसले देश कि आम जनता कि आर्थिक स्थिति सुधारते आये है कि तरह बर्बाद करते नही पूरा राज्य आपके में पर इतना आक्रोशित है कि यदि सत्ता और पद जाये और आप आम नेता की तरह सामने आये तो असल इज्जत मिलेगी आपको”
Anil Sonkar
“Foto khichane ko uplabdhi bta rhe …wahhh IAS sahab  …”


Shrikant Patel
“Comment section se pata chal hi gya hoga OP sahab…Is baar election me hissa mat lena .”


Pc Rath
“बस डॉलर और रुपए की कीमत के अंतर से जांच लीजिए कि कितना गिरा हुआ है, खुद के गुजरात सीएम जमाने के बयान से वे अपना मूल्यांकन कर सकते हैं, आप तो अपनी विश्वसनीयता राज्य में बचाइए।”
Alok Kumar Dubey
“हम सब के लिए गर्व की बात है कि हम ऐसे समय में है जब हमारे प्रधानमंत्री आदरणीय मोदी जी हैं और जिनका डंका सम्पूर्ण विश्व में बज रहा है”
Monu Agrawal A
“देश में आज हर जगह भ्रष्टाचार है रोड सड़क नाली स्वास्थ्य शिक्षा सभी जगह की हालत गंभीर है यह कैसा विकास हो रहा है समझ ही नहीं आ रहा है सर जी टोल टैक्स पूरा रहते हैं रोड खराब है”
Arun Patel
“तभी टैरिफ 3 प्रतिशत से 18 प्रतिशत लागू हो गया कर्ज 55लाख करोड़ से 225 लाख करोड़ सोना 28 से 160”
Mrigendra Pratap Singh
“क्या बात है…..
दुनिया के सभी लीडर कतार में खड़े हैं इन महामानव से सलाह लेने के लिए ”
Yugnarayan Barman
“जो कमजोर स्तंभ होते हैं उसे चारों ओर से पकड़ कर रखा जाता है ताकि उसका बैलेंस बना रहे”
Chayan Shukla
“सर आप एक मिसाल है बाहरी दुनिया के जीवो के लिए ”
Shyama Yadav
“चलिए मोदी जी पहले लाइन में है,तो आप भी उनसे कुछ सीखते हुए chhattisgarh को पहले लाइन में ले आइए आपको मौका मिला है”
Ravi Dhruw
“पहले के प्रधानमंत्री को अंग्रेजी बोलना आता था और अब….. ”
Rajeev Rathore


“Chhoti soch…”


Amit Banjare
“कभी सोचा नहीं था कि आप भी लोगो को अंधेरा में रखेंगे”
Jitendra K Chandravanshi
“फोटो खिंचाना एक कला है और काम करना दूसरी कला है।”
Laxman Sahu
“गल गोटिया ने हिला दी पोल खोल दी”

उपरोक्त कमेंट्स को देखते हुए यह जरूर कहा जा सकता है कि ओपी चौधरी की ज़मीन अभी पूरी तरह खिसकी नहीं है, लेकिन दरारें दिखने लगी हैं। राजनीति में अक्सर यही क्षण तय करता है कि नेता आगे मज़बूत होकर उभरेगा या धीरे-धीरे अपने ही समर्थकों से दूर होता जाएगा।फिलहाल इसे सीधे तौर पर “ज़मीन खिसकना” कहना जल्दबाज़ी होगी। ऐसी स्थिति में किसी भी नेता के लिए सबसे अहम होता है कि फीडबैक को खतरा नहीं, चेतावनी मानना। अगर आलोचना को संवाद में बदला जाए, जमीनी मुद्दों पर स्पष्ट जवाब दिया जाए और राज्य स्तर पर ठोस परिणाम दिखे, तो यही असंतोष दोबारा समर्थन में बदल सकता है वैसे भी सोशल मीडिया अक्सर असंतोष का पहला संकेत देता है, न कि अंतिम फैसला। लेकिन इतना साफ है कि
समर्थकों का सवाल पूछना बढ़ा है…………..

मुख्य संपादक यशवंत खेडुलकर

सह सम्पादक शैलेन्द्र चिटनवीस जशपुर जिला

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