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मात्र दो दिन की शॉर्ट नोटिस पर कड़ाके की ठंड में भी 42 परिवारों के पेशानी पर चमकी पसीने की बूंदे… आजीविका पर मंडराया संकट-इस कम्पनी के आदेश से कामगारों की स्थिति हुई विकट … आक्रोश, बेबसी,दर्द को बयां करते कामगारों का देखें वीडियो..

हिंडाल्को की छंटनी से कामगारों में आक्रोश..

15 दिसंबर को जारी हुआ आदेश 17 से नौकरी ख़त्म..

पांच वर्ष पूर्व भी 901 कामगारों को फोर्स फुली पकड़ाया गया था वीआरएस

विरोध के स्वर कुचलने बाउंसरो को किया तैनात..

रायगढ़। आदित्य बिरला समूह की कंपनी हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा गारे पाल्मा IV/5 कोयला खदान के 42 कर्मचारियों की छंटनी के आदेश ने वर्षों से सेवा दे रहे कामगारों के सामने गंभीर आजीविका संकट खड़ा कर दिया है। अचानक जारी इस आदेश से प्रभावित परिवारों में चिंता और असुरक्षा का माहौल है।

आपको बता दें कि हिंडाल्को प्रबंधन द्वारा जारी पत्र के अनुसार, गारे पाल्मा IV/5 कोयला खदान के समर्पण के बाद कोयला मंत्रालय के नामित प्राधिकरण द्वारा वेस्टिंग आदेश संख्या NA/104/2/2025 दिनांक 4 फरवरी 2025 के तहत यह खदान शारदा एनर्जी एवं मिनरल्स लिमिटेड को आवंटित की गई थी। इसके पश्चात 1 जुलाई 2025 से खदान का हस्तांतरण हो जाने के कारण यह खदान अब हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड के अधीन नहीं रही।

प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि इस परिस्थिति में कर्मचारियों की सेवाएँ जारी रखना संभव नहीं है। छंटनी का निर्णय औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 25F तथा कर्मचारियों की नियुक्ति शर्तों के क्रम संख्या 4 एवं 5 के अंतर्गत लिया गया है।

प्रभावित कर्मचारियों को व्यक्तिगत रूप से सूचना दी जाएगी तथा उनकी सेवा समाप्ति से संबंधित सभी देय राशियों का पूर्ण और अंतिम निपटान किया जाएगा। छंटनी से प्रभावित कर्मचारियों की सूची पत्र के साथ संलग्न की गई है।

पत्र में हिंडाल्को प्रबंधन ने इस निर्णय से कर्मचारियों एवं उनके परिवारों पर पड़ने वाले प्रभाव के प्रति खेद व्यक्त करते हुए कहा है कि कंपनी सभी प्रभावित कर्मचारियों के लिए एक सम्मानजनक और सहज विदाई प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

कामगारों का कहना है कि इनमें से कई कर्मचारी 15–20 वर्षों से अधिक समय से खदान में कार्यरत रहे हैं। छंटनी के बाद उनके सामने रोज़ी-रोटी का सवाल खड़ा हो गया है। कामगारों के अनुसार, “आज के समय में नई नौकरी पाना आसान नहीं है, खासकर उन कर्मचारियों के लिए जो उम्रदराज़ हैं। ऐसे में परिवार के भरण-पोषण की चिंता उन्हें भीतर से तोड़ रही है।”

कामगार पक्ष का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन ने खदान के हस्तांतरण को आधार बनाकर वर्षों पुराने कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया, जबकि उनके पुनर्वास या वैकल्पिक रोजगार की कोई ठोस योजना सामने नहीं रखी गई। उनका कहना है कि इस फैसले से कई परिवारों के सामने भूखे मरने जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

कामगार पक्ष ने यह भी याद दिलाया कि हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने वर्ष 2021 में कोरोना काल के दौरान भी कथित तौर पर 901 कर्मचारियों को जबरन वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना) देकर काम से बाहर कर दिया था। उस मामले को लेकर कर्मचारियों द्वारा दायर याचिका जबलपुर में अब भी न्यायालय में लंबित है।
उनका आरोप है कि कंपनी लगातार मुनाफे की आड़ में कामगारों के अधिकारों की अनदेखी कर रही है और एकतरफा फैसले थोपे जा रहे हैं। उन्होंने इसे “कंपनी की तानाशाही कार्यशैली” करार देते हुए कहा कि प्रबंधन श्रम कानूनों की आत्मा के विपरीत जाकर निर्णय ले रहा है।
उनका कहना है कि यदि समय रहते इस फैसले की समीक्षा नहीं की गई, तो वे आंदोलन और कानूनी रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

छंटनी के इस फैसले ने एक बार फिर बड़े औद्योगिक घरानों और श्रमिक अधिकारों के बीच के टकराव को उजागर कर दिया है, जहां वर्षों तक सेवा देने वाले कामगार आज अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता और भय के साए में जीने को मजबूर हैं।

मुख्य संपादक यशवंत खेडुलकर

सह सम्पादक शैलेन्द्र चिटनवीस जशपुर जिला

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