खेल जगत

25 अगस्त का वो सुनहरा पल, जब तजिंदरपाल सिंह ने शॉट पुट में रचा इतिहास

भारतीय शॉट पुट खिलाड़ी तजिंदरपाल सिंह ने अपने दमदार प्रदर्शन से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया है। पंजाब से आने वाले तजिंदर ने कम उम्र में ही एथलेटिक्स की ओर रुझान दिखाया। उनकी ताकतवर थ्रो तकनीक और मेहनत ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक दिलाए। 25 अगस्त 2018 को एशियन गेम्स में उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा और देशवासियों को गर्व का पल दिया।

13 नवंबर 1994 को खोसा पंडो गांव के किसान परिवार में जन्मे तजिंदरपाल सिंह की रुचि बचपन से ही खेलकूद में थी। तजिंदर क्रिकेटर बनना चाहते थे, लेकिन पिता की इच्छा थी कि बेटा व्यक्तिगत खेल खेले। तजिंदरपाल सिंह के पिता करम सिंह आसपास के इलाकों में रस्साकशी खेल के लिए मशहूर थे। वहीं, चाचा गुरदेव सिंह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शॉट पुट विजेता रह चुके थे।

2015 में पिता को हुआ था केंसर

तजिंदरपाल सिंह ने चाचा गुरदेव सिंह की निगरानी में शॉट पुट की ट्रेनिंग शुरू की और जल्द ही खेल में अपना लोहा मनवाना शुरू कर दिया। साल 2015 में तजिंदरपाल सिंह के पिता को स्किन कैंसर, जबकि अगले साल बोन कैंसर का पता चला, जो चौथी स्टेज में था। तजिंदर उस वक्त भारतीय नेवी में कार्यरत थे। तजिंदर के पिता के इलाज का खर्चा नेवी उठा रही थी। ऐसे में तजिंदर को अपने खेल पर फोकस करने में मदद मिली।

18वें एशियन गेम्स ने रचा इतिहास

साल 2106 में फेडरेशन कप शॉट पुल खिताब जीतने के बाद उन्हें बड़ी पहचान मिली। साल 2017 में उन्होंने अल्माटी कोसानोव मेमोरियल में अपना पहला इंटरनेशनल खिताब जीता, जिसके एक महीने बाद एशियन चैंपियनशिप में 19.77 मीटर के थ्रो के साथ सिल्वर जीता। 25 अगस्त 2018 को 18वें एशियन गेम्स में तजिंदरपाल सिंह ने इतिहास रचते हुए गोल्ड मेडल जीता। इसके साथ ही उन्होंने नेशनल रिकॉर्ड भी बना दिया था।

तजिंदरपाल सिंह ने 20.75 मीटर की दूरी पर गोला फेंकते हुए गोल्ड जीतते हुए छह साल पहले ओम प्रकाश करहाना (20.69 मीटर) के नेशनल रिकॉर्ड को भी तोड़ा। इसके साथ ही सऊदी अरब के सुल्तान-अल हेब्सी (20.57 मीटर) के 2010 एशियन गेम्स में बनाए गए गेम्स रिकॉर्ड को भी ध्वस्त कर दिया।

साल 2019 में तजिंदरपाल सिंह को ‘अर्जुन अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। तजिंदर का मानना है कि अनुशासन और कठिन प्रशिक्षण से ही सफलता मिलती है। यही वजह है कि वह आज युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।

मुख्य संपादक यशवंत खेडुलकर

सह सम्पादक शैलेन्द्र चिटनवीस जशपुर जिला

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