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57 दिन में 257 मौतें, 133 प्राकृतिक आपदाएं और 124 सड़क हादसे, डरा देंगे हिमाचल सरकार के ये आंकड़े

हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष मानसून ने तबाही मचा दी। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष मानसून सीजन के दौरान राज्य में विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के चलते 133 लोगों की मौत हुई है। वहीं, सड़क हादसों में भी 124 लोगों ने अपनी जान गंवाई। इस प्रकार कुल मिलाकर प्रदेश में 257 लोगों की जान मानसून से जुड़े हादसों में गई है।

सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, प्राकृतिक कारणों से सबसे अधिक मौतें कांगड़ा जिले में हुई हैं, जहां 28 लोगों की जान गई। इसके बाद मंडी (26 मौतें) और हमीरपुर (13 मौतें) प्रमुख रूप से प्रभावित जिले रहे।

मौतों के प्रमुख कारण क्या हैं?

मानसून के दौरान प्रदेश के कई जिलों में भूस्खलन, फ्लैश फ्लड, बादल फटना, डूबने की घटनाएं, करंट लगना और सांप काटने जैसे हादसों से जानें गईं। डूबने से सबसे ज्यादा 27 मौतें दर्ज की गईं, जिनमें मंडी (17), कुल्लू (3) और लाहौल-स्पीति (3) प्रमुख हैं। क्लाउडबर्स्ट (बादल फटना) से 17 लोगों की जान गई, जिनमें मंडी में सबसे ज्यादा 4 मौतें दर्ज हुईं। इसके साथ ही करंट लगने से 10 लोग मरे, जबकि सांप के काटने से 13 और ऊंचाई से गिरने के कारण 27 लोगों की जान गई। अन्य कारणों से 21 मौतें दर्ज की गईं।

प्राकृतिक कारणों से जिलेवार मौतों की संख्या

जिला मौतें
कांगड़ा 28
मंडी 26
हमीरपुर 13
कुल्लू 11
चंबा 10
शिमला 10
किन्नौर 9
ऊना 8
लाहौल-स्पीति 6
बिलासपुर 7
सिरमौर 3
सोलन 3

सड़क हादसों में जानलेवा स्थिति

प्राकृतिक आपदाओं के साथ-साथ हिमाचल में सड़कों की स्थिति और मौसम के कारण हुई दुर्घटनाओं में 124 लोगों की जान गई। इनमें सबसे अधिक मौतें चंबा (20), मंडी (21), शिमला (15) और कांगड़ा (12) में हुईं। इसके अलावा सोलन और कुल्लू में भी 13-13 लोगों की जान गई।

जिला अनुसार सड़क हादसों में मौतें

जिला मौतें (सड़क हादसे)
मंडी 21
चंबा 20
शिमला 15
सोलन 13
कांगड़ा 12
कुल्लू 11
किन्नौर 11
सिरमौर 7
ऊना 6
बिलासपुर 3
हमीरपुर 3
लाहौल-स्पीति 1

सरकारी अधिकारियों ने इन मौतों को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है और दावा किया है कि सभी प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य तेजी से किए गए। वहीं विपक्ष ने आरोप लगाया है कि समय रहते चेतावनी और सुरक्षा उपायों की कमी के चलते यह बड़ा नुकसान हुआ है।

हिमाचल के लिए मानसून बना जानलेवा

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि हिमाचल प्रदेश में मानसून का प्रभाव जानलेवा बनता जा रहा है। चाहे वह प्राकृतिक आपदाएं हों या खराब मौसम में वाहन दुर्घटनाएं हर मोर्चे पर सावधानी और बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता है। सरकार को चाहिए कि आपदा प्रबंधन, सड़क सुरक्षा और तकनीकी निगरानी के उपायों को और अधिक सुदृढ़ बनाए ताकि भविष्य में इन घटनाओं को कम किया जा सके।

मुख्य संपादक यशवंत खेडुलकर

सह सम्पादक शैलेन्द्र चिटनवीस जशपुर जिला

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