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3 लाख लोग बेघर, सड़कें बनीं दरिया…पंजाब के 12 जिले बाढ़ की चपेट में

उत्तर भारत के कई हिस्सों में इस समय बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है, लेकिन सबसे गंभीर हालात पंजाब में देखे जा रहे हैं। बीते दिन से यहां स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। अगर पाकिस्तान बाढ़ का कारण भारत को मानता है तो यह भी सवाल उठता है कि आखिर भारत के पंजाब में इतनी भीषण बाढ़ क्यों आई है?

ब्यास, रावी, घग्गर औरसतलुज जैसी नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है, जिससे पंजाब में टेंशन का माहौल है। राज्य के लगभग 1,000 से अधिक गांव पानी के चपेट में आ चुके हैं और लोगों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। राहत व बचाव कार्यों के लिए आपदा प्रबंधन दल पूरी क्षमता के साथ जुटे हुए हैं और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की कोशिशें लगातार जारी हैं।

इस समय पंजाब के 23 में से 12 जिले बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। अब तक बाढ़ से 30 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लगभग 15 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। इनमें से करीब 3 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इस आपदा का असर पंजाब की खेती पर भी गहराई से पड़ा है। CM भगवंत मान और राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने अलग-अलग बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया।, राज्यपाल ने फिरोजपुर और तरनतारन के गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। जबकि CM ने नाव से फिरोजपुर के डूबे हुए इलाकों का जायजा लिया

रणजीत सागर बांध और भाखड़ा, पोंग अब अधिकतम क्षमता तक भर चुके हैं। ब्यास नदी में 1.09 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जिससे बाढ़ का खतरा और ज्यादा बढ़ गया है। पोंग डैम का जलस्तर 1,391 फीट पर पहुंच गया है, जो खतरे के स्तर 1,390 फीट से भी ऊपर है। वहीं रवि नदी का बहाव 14.11 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया है, जो 1988 की भीषण बाढ़ के समय दर्ज 11.20 लाख क्यूसेक से भी काफी अधिक है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस आपदा को जलवायु परिवर्तन और मानवीय लापरवाही ने और गंभीर बना दिया है। नदियों की समय पर सफाई न होना, बाढ़ क्षेत्र पर कब्जे और कमजोर बांध इसकी बड़ी वजह बताए जा रहे हैं। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही भारी बारिश ने नदियों के जलस्तर को खतरनाक स्तर तक पहुंचा दिया है, जिससे पंजाब में हालात और बिगड़ गए हैं।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले दो दिन और तेज बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। इस बीच, राज्य सरकार ने विशेष “गिरदावरी” यानी फसल नुकसान का आकलन कराने के निर्देश दिए हैं, जो पानी उतरने के बाद शुरू होगा। बाढ़ के कारण किसानों को खासकर धान की फसल के समय भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान तेज़ी से चल रहे हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की 23 टीमें, सेना, वायुसेना, नौसेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) की टीमें लगातार प्रभावित जिलों में तैनात हैं। इसके साथ ही 114 नावें और राज्य सरकार का एक हेलीकॉप्टर भी बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। अब तक 15,688 लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा चुका है।

पिछले छह वर्षों के दौरान पंजाब तीसरी बार बाढ़ की चपेट में आया है। इससे पहले 2023 और 2019 में भी राज्य को इसी तरह की आपदा का सामना करना पड़ा था। 2023 की बाढ़ में पंजाब के 1500 से अधिक गांव डूब गए थे और लगभग 2 लाख 21 हजार हेक्टेयर जमीन पर खड़ी फसल पूरी तरह नष्ट हो गई थी। वहीं, 2019 की बाढ़ में 300 से ज्यादा गांव प्रभावित हुए थे और हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा था।

मुख्य संपादक यशवंत खेडुलकर

सह सम्पादक शैलेन्द्र चिटनवीस जशपुर जिला

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