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रेखा गुप्ता दिल्ली की नई CM, राजधानी में चौथी महिला मुख्यमंत्री; 3 वजहों से मौका

नई दिल्ली. दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान कर दिया है। रेखा गुप्ता अब दिल्ली के नई मुख्यमंत्री होंगी। कल दोपहर करीब साढ़े 12 बजे रामलीला मैदान में वह मंत्रियों के साथ शपथ लेंगी। रेखा गुप्ता दिल्ली की चौथी महिला मुख्यमंत्री हैं। उनसे पहले आतिशी मार्लेना, शीला दीक्षित और सुषमा स्वराज दिल्ली की महिला सीएम रही हैं। रेखा गुप्ता भाजपा की 5वीं महिला मुख्यमंत्री हैं।

रेखा गुप्ता पहली बार की विधायक हैं। उन्होंने शालीमारबाग सीट से 29 हजार से अधिक वोटों से जीत हासिल की है। अब तक सबसे प्रबल दावेदार बताए जा रहे प्रवेश वर्मा ने रेखा गुप्ता के नाम का प्रस्ताव रखा। भाजपा प्रदेश कार्यालय में केंद्रीय पर्यवेक्षकों रविशंकर प्रसाद और ओपी धनखड़ की मौजूदगी में रेखा गुप्ता के नाम पर विधायकों ने सहमति की मुहर लगाई। 8 फरवरी को भाजपा की जीत के बाद से ही नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर अटकलों का दौर चल रहा था। रेस में करीब एक दर्जन नेताओं के नाम गिनाए जा रहे थे।

पहली वजह- रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाए जाने के पीछे कई वजहें हैं। मुख्यतौर पर पहली वजह महिला कार्ड है। एक महिला मुख्यमंत्री की सत्ता से विदाई के बीच भाजपा ने एक अन्य महिला को ही दिल्ली संभालने का मौका दिया है। दिल्ली के चुनाव में महिला वोटर्स को लेकर भाजपा और आप में काफी होड़ दिखी थी। दूसरी वजह- रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा ने वैश्य समाज को भी साधा है। वैश्य समाज को भाजपा का कट्टर समर्थक माना जाता रहा है। ऐसे में भाजपा ने एक वैश्य सीएम देकर समुदाय को रिटर्न गिफ्ट दिया है।

तीसरी वजह- रेखा गुप्ता का संघ परिवार से तीस साल पुराना नाता है। वह छात्र राजनीति से ही सक्रिय रही हैं। भाजपा के छात्र संगठन में भी लंबे समय तक काम कर चुकी हैं। 1996-97 में दिल्ली छात्र संघ की अध्यक्ष रह चुकी हैं। गुप्ता ने भाजपा दिल्ली में महिला मोर्चा की महासचिव और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य के रूप में भी कार्य किया है।

रेखा गुप्ता दिल्ली की 8वीं मुख्यमंत्री हैं। अंतरिम सरकार के दो सीएम को जोड़ लें तो वह 10वीं मुख्यमंत्री हैं। दिल्ली में इससे पहले आतिशी, अरविंद केजरीवाल, शीला दीक्षित, सुषमा स्वराज, साहिब सिंह वर्मा, मदनलाल खुराना, गुरमुख निहाल सिंह और ब्रह्म प्रकाश को मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला।
27 साल बाद भाजपा को दिल्ली में सरकार बनाने का मौका मिला है। इससे 1993 से 1998 तक राजधानी दिल्ली में भाजपा की सरकार थी। लेकिन तब 5 साल में तीन बार मुख्यमंत्री बदलने की नौबत आ गई थी। क्रमश: मदन लाल खुराना, साहिब सिंह वर्मा और सुषमा स्वराज को सीएम की कुर्सी पर बिठाया गया था।

भाजपा की जीत होती है तो मुख्यमंत्री कौन बनेगा? इसे ‘आप’ की ओर से बड़ा मुद्दा बनाया गया था। अरविंद केजरीवाल ने बार-बार भाजपा को मुख्यमंत्री पद के दावेदार के नाम की घोषणा करने की चुनौती दी थी। ‘आप’ ने इसे अपने कैंपेन का हिस्सा बनाते हुए पूछना शुरू कर दिया कि ‘भाजपा का दूल्हा’ कौन है? पार्टी ने एक अनोखा तरीका अपनाते हुए दिल्ली में कई जगह बैंड-बाजे के साथ खाली घोड़ा भी घुमाया। भाजपा ने बार-बार एक ही जवाब दिया कि सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाएगा और मुख्यमंत्री पद की घोषणा चुनाव बाद विधायक दल की बैठक में होगी।

भाजपा ने करीब तीन दशक बाद दिल्ली में बहुमत हासिल किया है। भाजपा ने 5 फरवरी को हुए मतदान में 48 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं, पिछले दो चुनावों में प्रचंड बहुमत हासिल करने वाली ‘आप’ 22 सीटों पर सिमट गई। 2020 में अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने 63 और 2015 में 67 सीटों पर जीत हासिल की थी। 2013 के चुनाव में भाजपा बहुमत से कुछ ही कदम दूर रह गई थी। तब ‘आप’ ने कांग्रेस के साथ मिलकर पहली बार सरकार बनाई थी। हालांकि, यह सरकार 49 दिन ही चल पाई थी।

मुख्य संपादक यशवंत खेडुलकर

सह सम्पादक शैलेन्द्र चिटनवीस जशपुर जिला

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