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कोलोडियन बेबी सिंड्रोम से पीड़ित बच्चा

दुनियाभर में कई बीमारियों का जाल फैला हुआ है जिनके बारे में कम लोग ही जानते है। हाल ही में मध्यप्रदेश के रीवा जिले से एक मामला सामने आया है जिसमें त्योंथर तहसील के ढकरा सोंनौरी गांव निवासी प्रियंका पटेल ने बच्चे को जन्म दिया। बच्चा दुर्लभ बीमारी कोलोडियन बेबी सिंड्रोम से पीड़ित है। इस बीमारी में बच्चे का शरीर अन्य बच्चे के मुकाबले बिल्कुल असामान्य होता है।

दरअसल इस बच्चे के त्वचा सफेद और मोटी थी, जिसमें जगह-जगह दरारें थीं और पूरा शरीर विकृत नजर आ रहा था। इस बीमारी के मामले वैसे तो कम नजर आते है लेकिन इसका निदान क्या संभव है चलिए बात करते है…

पहले जानिए क्या होती है यह बीमारी

इस बीमारी की बात की जाए तो, यह नवजात बच्चों में होने वाली कोलोडियन बेबी सिंड्रोम नामक दुर्लभ बीमारी है। इस बीमारी में दरअसल बच्चों की त्वचा असामान्य रूप से मोटी हो जाती है और उस पर दरारें पड़ जाती हैं। इतना ही नहीं इस बीमारी में आंखें, नाक और कान जैसी अंग संरचनाएं भी पूरी तरह विकसित नहीं होतीं। इस कारण बच्चा सामान्य बच्चों की तुलना में असामान्य नजर आता है।

इस बीमारी को लेकर हेल्थ एक्सपर्ट बताते है कि, यह बीमारी जेनेटिक और नॉन-जेनेटिक दोनों कारणों से हो सकती है। दरअसल कोलोडियन बेबी एक फेनोटाइप है, जो इचथियोसिस के विभिन्न रूपों से जुड़ा है। इस बीमारी में त्वचा में दरारें होने के कारण नवजात बच्चे को इंफेक्शन की शिकायत ज्यादा हो जाती है।

बच्चे का इलाज जारी

रीवा में इस बीमारी से पीड़ित बच्चे की हालत खराब होने के बाद रीवा के गांधी मेमोरियल अस्पताल में भर्ती किया गया है। यहां स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट (SNCU) में उसे ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है क्योंकि उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही है। इस बीमारी से पीड़ित बच्चे को डर्मेटोलॉजिस्ट की टीम विशेष स्किन केयर ट्रीटमेंट दे रही है। डॉक्टरों ने कहा है कि अगर समय रहते सही इलाज न मिले तो यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है। बताते चलें तो, कुछ मामलों में, रेटिनोइड्स और केराटोलाइटिक एजेंटों का उपयोग किया जा सकता है।

मुख्य संपादक यशवंत खेडुलकर

सह सम्पादक शैलेन्द्र चिटनवीस जशपुर जिला

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