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सरकारी नौकरी भी और लाडली बहन भी, योजना के सबसे बड़े घोटाले का पर्दाफाश, चपरासी से लेकर लिपिक तक….

लाडली बहन’ योजना से महायुति को सत्ता में आने का फायदा तो हुआ लेकिन अब इस योजना में बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। जिले की 13 तहसीलों में कुल 1,129 सरकारी नौकरी करने वाली महिलाओं ने इस योजना का अनुचित लाभ लिया है। इस पर कार्रवाई के लिए जिला परिषद के महिला एवं बाल कल्याण विभाग ने विभागीय आयुक्त कार्यालय को प्रस्ताव भेजा है।

जानकारी के अनुसार, सरकारी नौकरी में रहते हुए भी कई महिलाओं ने स्वयं को ‘लाडली बहन’ बताकर अनुदान राशि अपने खाते में जमा करवाई। नियम के अनुसार नौकरीपेशा महिलाएं, चारपहिया वाहन धारक, आयकरदाता तथा एक ही घर की एक से अधिक महिलाओं को यह लाभ नहीं दिया जाना चाहिए। करीब 84,000 महिलाएं संदेह के दायरे में आई हैं जिनमें से 34,000 लाभार्थी ग्रामीण भाग की हैं।

इसके लिए आंगनवाड़ी सेविकाओं के माध्यम से घर-घर जाकर जांच और सर्वे किया गया। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद 1,129 महिलाएं नौकरीपेशा पाई गईं। इनमें चपरासी से लेकर वरिष्ठ लिपिक पद तक की महिलाएं शामिल हैं। कुछ लाभार्थी महिलाओं ने पहली और दूसरी किस्त का पैसा लेने के बाद डर के चलते आगे का अनुदान बंद करने के लिए प्रशासन को आवेदन भी दिया था।

अपात्र महिलाओं की जानकारी शासन से प्राप्त हुई थी। उनकी जांच कर आधार कार्ड से पहचान सुनिश्चित की गई। शासन के निर्देशानुसार सरकारी नौकरी करने वाली महिलाओं की सूची विभागीय आयुक्त को भेज दी गई है।

मुख्य संपादक यशवंत खेडुलकर

सह सम्पादक शैलेन्द्र चिटनवीस जशपुर जिला

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