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जब हर बूंद के साथ बरसी फरियाद, बिजली ने ली सब्र की परीक्षा बार-बार,फिर आई लोगों को ओपी की याद..”उम्मीदों की पाती, ओपी के नाम”


“ओपी है तो उम्मीद है”—इस नारे ने जन-जन के दिलों में एक नई आस जगाई थी। उम्मीद थी कि अब बदलाव आएगा, अब वो सुनी जाएगी जो बरसों से अनसुनी रही है। लेकिन इस बारिश के मौसम में, जब हर घर में अंधेरा है और हर दिल में शिकायत—तब ओपी की पहचान बनी है “उम्मीदों की छतरी”

बिजली विभाग की फिर से ‘बेवफ़ाई’ पर शहर का भरोसा टूटा

सोशल मीडिया में वायरल होती पोस्ट का मजमून कुछ यूँ है कि..

वित्त मंत्री जी के अपने ही शहर में, बिजली विभाग की लापरवाही से लोग त्रस्त हैं। जोन 1, जिसमें शहर की लगभग 80% आबादी आती है, वहां मदद के नाम पर मात्र एक ही हेल्पलाइन नंबर है—07762-222935

  • यह नंबर या तो लगता ही नहीं,
  • और लग जाए तो कोई उठाता नहीं।

अब सवाल यह उठता है कि जब शहर की आबादी और दायरा दोनों कई गुना बढ़ चुके हैं, तो फिर वही बीसियों साल पुरानी व्यवस्था क्यों चल रही है? क्यों नहीं इस शहर को 6 जोन में बाँटा जाता? क्यों नहीं हर ज़ोन के लिए अलग हेल्पलाइन नंबर जारी किए जाते?

शहर बढ़ा, समस्याएँ बढ़ीं — लेकिन समाधान आज भी पुराना

आज जूटमिल, कोतरा रोड, और ढिमरापुर जैसे क्षेत्रों में नए जोन बनाने की सख़्त ज़रूरत है। लेकिन अफ़सोस, बिजली विभाग शहर की तरक़्क़ी में रोशनी की जगह अंधेरे का योगदान दे रहा है।

ओपी चौधरी जी से एक आख़िरी आस

जिस तरह ओपी जी ने इस शहर को पूरे प्रदेश में एक नई पहचान दिलाई है,
उसी तरह अब ये भी ज़रूरी है कि
बिजली विभाग के अंधेरों को भी उजाले में बदला जाए।

शहर की जनता आज भी उम्मीद की पाती लेकर ओपी जी के दर पर खड़ी है
क्योंकि जब बिजली विभाग ने  ली हैं आँखें मूंद
तो एकमात्र सहारा बनी — “ओपी से जागी उम्मीद


मुख्य संपादक यशवंत खेडुलकर

सह सम्पादक शैलेन्द्र चिटनवीस जशपुर जिला

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