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निगेटिव एनर्जी और बुरी नजर को खत्म करने के लिए इस दिन करें यह खास व्रत, पुराणों में भी लिखा है महत्व!

हिंदू कैलेंडर का दूसरा महीना वैशाख होता है. इस माह में किए गए धार्मिक कार्यों का कई गुना फल प्राप्त होने की मान्यता है. इस माह में प्रदोष व्रत का आगमन दो बार होता है. वैशाख कृष्ण पक्ष के प्रदोष व्रत को करने से जीवन में खुशहाली का आगमन होता है. वैशाख कृष्ण पक्ष के प्रदोष व्रत को विधि विधान से पूर्ण करने पर भगवान शिव और माता पार्वती प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं. इस दिन भगवान शिव की आराधना, स्तोत्र, मंत्रो का जाप करने से सभी बाधाएं, समस्याएं खत्म हो जाती हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. वैशाख कृष्ण पक्ष के प्रदोष व्रत का महत्व स्कंद पुराण में वर्णित है.

क्या कहना है एक्सपर्ट का
इसकी ज्यादा जानकारी देते हुए उत्तराखंड हरिद्वार के ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि वैशाख कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत बेहद ही खास और विशेष फल देने वाला होता है. स्कंद पुराण में वैशाख कृष्ण पक्ष के प्रदोष व्रत के महत्व का वर्णन किया गया है. इस प्रदोष व्रत को करने से बुरे प्रभाव और नकारात्मक ऊर्जा पूर्ण रूप से खत्म हो जाती है. भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित यह व्रत बेहद ही खास और विशिष्ट महत्व वाला है.

इस मंत्र का करें जाप
इस व्रत के दिन भगवान शिव की आराधना, रुद्राष्टक स्तोत्र, पशुपत्येष्टक स्तोत्र, शिव तांडव स्तोत्र, शिव महिम्न आदि स्तोत्र का पाठ, एकाक्षरी मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप, भगवान शिव के संपुट मंत्र का जाप करने से जीवन सुखमय हो जाता है और कार्यों में आ रही बाधा, रुकावट, नकारात्मक ऊर्जा, डर से मुक्ति आदि सभी में विशिष्ट लाभ प्राप्त होते हैं. साल 2025 में वैशाख कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत 25 अप्रैल शुक्रवार के दिन होगा. वैदिक पंचांग के अनुसार 25 अप्रैल को प्रदोष व्रत की उदया तिथि होगी. उदया तिथि 25 अप्रैल को होने से यह व्रत 25 अप्रैल को करना शुभ होगा.

मुख्य संपादक यशवंत खेडुलकर

सह सम्पादक शैलेन्द्र चिटनवीस जशपुर जिला

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